मन के भाव!
सूरज के तेजस घोड़े चले अंतरिक्ष के उस पार,मन में उमड़ते-घूमड़ते भाव, खोले ग्रह-नक्षत्र द्वार! परिंदों ने फैलाएं पँख, चले
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