Author: कुसुम अशोक सुराणा

भजन/भावगीत

शिवमय जीवन

सत्यम, शिवम् सुन्दरम।शिवमय जीवन मंगलम।। भोले बाबा सुन मम अरजी।सृष्टि सृजन है शिव मरजी।।नीलकंठ शिव डमरू धारी।ले त्रिशूल नाचत त्रिपुरारी।।

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कविता

खुद में झाँक

भीतर-भीतर कुतर रहा मन,विघ्नहर्ता का मुषक,व्याकुल-आकुल चेतन,होता स्व-अस्तित्व पर शक।। जीवन-साँझ की है बेला, आँगन चंपा-चमेली का मेला।देहरी पर जलते

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