शिवमय जीवन
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
शिवमय जीवन मंगलम।।
भोले बाबा सुन मम अरजी।
सृष्टि सृजन है शिव मरजी।।
नीलकंठ शिव डमरू धारी।
ले त्रिशूल नाचत त्रिपुरारी।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
गरिमामय जीवन मंगलम।।
शशिधर भार्या गिरिजा सोहे।
करुणा-ममता मूरत मोहे।।
तीन लोक के शंकर तारक।
भैरू तांडव खल संहारक।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
सुरभित जीवन मंगलम!
भूत प्रेत सहचर बाराती।
ब्रह्म वेद की अदभुत थाती।।
कंठी विषधर नन्दी वाहन।
जग कल्याणक दृष्टी पावन।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
अतिशय जीवन मंगलम।।
ले त्रिशूल निकले है शंकर।
तीन लोक में गूंजे मंतर।।
है त्रिनेत्र का क्रोध भयंकर।
शापित होता धरती अंबर।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
शान्तिमय जीवन मंगलम!
डम-डम डम-डम डमरू बाजे।
नाद-ताल पर शंकर नाचे।
काल रात्रि आई भारी।
अरि संहारी भोले भंडारी।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
मधुमय जीवन मंगलम।।
नागराज लिपटे कंठ में।
गंगा बहती है कुन्तल में।
नीलकंठ का डमरू बोले ।
नाचत नाचत शम्भू डोले।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
शुद्ध-बुद्ध जीवन मंगलम।।
सत्यम, शिवम् सुन्दरम।
सृष्टितारक जीवन मंगलम।।
— कुसुम अशोक सुराणा
