लघुकथा – वेतन वृद्धी
शिक्षकों की हडताल आज 21वें दिन में प्रवेश कर गई थी। मगर शासन झुकने को जरा भी तैयार नहीं था।
Read Moreशिक्षकों की हडताल आज 21वें दिन में प्रवेश कर गई थी। मगर शासन झुकने को जरा भी तैयार नहीं था।
Read Moreमंदिर मस्जिद चर्च गुरूद्वारेनदिया परबत जंगल सारेढूँढ ढूँढ़ थक हार गया मैंकहीं मिले ना मोहन प्यारे |तभी अचानक एक बूढ़े
Read Moreकस्बे के मेले में आये मध्यमवर्गीय परिवार के 14 वर्षीय प्रकाश की नजरें अचानक रिमोट से चलने वाली घंटी
Read Moreतीन दिन से घनघोर बारिश जारी थी । नदी , तालाब , नाले तो ठीक सडक के गड्डे पोखर
Read Moreमंजिलें अपनी है कुछ दूर जरा धीरज धर अभी चलना है बहुत दूर जरा धीरज धर तू परेशान ना हो
Read Moreरात काली है बादल घनेरे भी हैँ पर इन्ही बादलोँ मे छुपा चाँद है . गम ना कर संग तेरे
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