लघुकथा – नारी विमर्श
बहुत बडी सभा चल रही थी । नारियों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सारा देश चिन्तित था । कहीं
Read Moreबहुत बडी सभा चल रही थी । नारियों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सारा देश चिन्तित था । कहीं
Read Moreबहुत दिमाग ख़राब हो गया था अनारे बाबू का . स्टाफ वाले बड़े बाबू ने पार्टी दी थी . उनके
Read Moreजैसे ईश्वर ने ये दुनिया बनाई, इन्सानों को बनाया, उसी तरह सभी प्रकार के भाव स्वभाव आचार विचार और पृवत्तियां
Read More“ सुनो जी वो बिस्तर पेटी में से टाट वाली गोदड़ी निकाल देना , मांजी के लिए बिछाना है।” नीलू
Read Moreसमस्त आर्यावर्त में बुद्धम शरणम गच्छामि संघम शरणम गच्छामि का शाश्वत गान गूंज रहा था बुद्ध स्वयं नगर नगर द्वार
Read Moreशिक्षकों की हडताल आज 21वें दिन में प्रवेश कर गई थी। मगर शासन झुकने को जरा भी तैयार नहीं था।
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