लघुकथा – नारी विमर्श
बहुत बडी सभा चल रही थी । नारियों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर सारा देश चिन्तित था । कहीं बहुऐं घरेलु हिंसा से दुखी थी । दहेज के लिये उन्हे प्रताडित किया जाता था , जला भी दिया जाता था । वृद्ध महिलायें बेटों से और पारिवारिक प्रताडना से दुखी थी । युवा स्त्रियां पतियों की उपेक्षा , उनके अनैतिक सम्बंधोँ से और अत्याचारों से दुखी थी । महिला वर्ग में, बुद्धीजिवियों मे तथा समाजसेवियों मे इन बातों को लेकर हाहाकार मचा हुआ था ।
मंच पर विराजीत तीन महिला वक्ताओं के साथ एक पुरुष वक्ता को भी स्थान दिया गया था , पुरुष वर्ग के लज्जाजनक व्यवहार का जवाब देने के लिये । प्रथम वक्ता एक बहू थी जिसने परिवारों मे होने वाली हिंसा , प्रताडना भेदभाव और दहेज के लिये बहूओं को जला डालने जैसे दुष्कृत्यों की घोर निन्दा करते हुए इन्हे रोकने पर बल दिया ।
दुसरी वक्ता एक बुजुर्ग महिला थी जो समाज मेँ वृद्ध महिलाओं की उपेक्षा से दुखी थी , परिवार मे सासुओं और बुढी माँओँ के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की दुहाई दे रही थी । तीसरी युवा महिला पुरुषों की आवारागर्दी चरित्रहीनता और अनैतिकता का बखान करती हुइ उनके बेवफाई के किस्से सुना रही थी । सारा पंडाल शेम शेम की आवाजों से गुंज रहा था । ऐसे में सबकी नजरें माईक सम्हालते पुरुष वक्ता पर टिक गई , देखें अब क्या जवाब देता है ये पुरुष प्रतिनिधि ।
पुरुष प्रतिनिधी ने कुछ मुस्कराते हुए अपनी बात शुरु की । उसकी मुस्कराहट महिला प्रतिनिधियों को जरा भी नहीं सुहा रही थी । पुरुष वक्ता ने अपना वक्तव्य शुरू किया .
परम सम्माननीय नारी शक्ति आपके सारे आरोप मंजुर है लेकिन , आप सिर्फ यह बता दें कि उपरोक्त सारे अत्याचारों में से अधिकांश मेँ जैसे बहु के प्रति पारिवारिक हिंसा , दहेज प्रताडना या बहू को जिन्दा जला देना और बुजुर्ग महिलाओं यानी माँ तथा सासु आदि की उपेक्षा प्रताडना या कष्ट देना तथा कार्यालयों मेँ या समाज मेँ पुरुषवर्ग की चरित्रहिनता , दुराचार आदि सभी घटनाओं मेँ एक सहयोगी के रुप मेँ हर जगहं क्या कोई एक अन्य नारी भी उपस्थित नहीं है ?
परिवार मेँ बहू के उपर होने वाले अत्याचारों मेँ सासु रुप मेँ या ननद के रूप मेँ , , माँ तथा सासु के उपर होने वाले अत्याचारों में बहू के रुप मेँ तथा पुरुषों के पथभ्रष्ट होने यानि परनारीगमन मेँ सहायक दुसरे पक्ष यानि इसी स्त्री के रूप मेँ भी कोई ना कोई अन्य नारी अवश्य ही रही है । हर जलने वाली बहू को जलाने में , माचीस की तीली या घासलेट की केन लेकर सासु या ननद के रुप में कोई महिला ने भी हाथ बंटाया हे । फिर आप पुरुषों को ही दोष क्यों दे रही हो ? आपके उपर होने वाले अत्याचार काफी कम हो जायेंगे यदि आप सब नारियां भी संगठित हो जाओ और एक दुसरे के हित का सोंचो तो ।
पुरुष प्रतिनिधि की बात समाप्त होते होते पूरी सभा मे सन्नाटा छा गया था । सारी महिलाएं एक दुसरे की ओर देखती हुई अपनी गरदनें झुका रही थी ।
— महेश शर्मा
