रूकावटें आएंगी पर कमजोर नहीं बनना है
राह में पत्थर
कदम ठिठके पल भर
हौसला आगे
अंधेरी रात
दीपक खुद बनना है
सूरज भीतर
टूटी उम्मीद
फिर भी बीज बोना
कल की खातिर
आँधी बोले
झुकना ही समझदारी
जड़ें मुस्काईं
थकी सी साँस
फिर भी चलना है
मंज़िल पास
गिरना भी
चलने की भाषा है
सीख ले मन
खामोशी में
संघर्ष गाता है
सच का गीत
— डॉ. अशोक
