Author: डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

गीतिका/ग़ज़ल

बेचैनियां बदलती रहीं करवटें रात भर,

आंखों में साहिलों की तरह बेचैनियां रहीं,हाथों में इंतज़ार की बस बैसाखियां रहीं।उम्मीदें इधर उधर बस यूं ही भागती रहीं,मौजें

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भाषा-साहित्य

किताबों में बंद कहानियाँ हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक विकास का आधार हैं

किताबें केवल काग़ज़ के पन्नों का ढेर नहीं होतीं। ये मानव के सदियों पुराने अनुभव, ज्ञान, आशाएँ और आँसुओं का

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इतिहास

स्मिता पाटिल,अभिनय की अनंत गहराई

स्मिता पाटिल का अभिनय भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा अध्याय है जो यथार्थवाद, संवेदनशीलता और स्त्री-संघर्ष की अनकही

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कविता

अलाव के गिर्द मीठी चाय की चुस्कियां

सर्दियों की वो प्यारी ठूंठरन अब कहाँ,वो लकड़ी के अलाव चिंगारियाँ कहाँ।सर्दियों की वो दिलकश गर्माहट कहां,अब वो गाँव के

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