उसकी अक़्लमंदी
उससे मेरी मुलाक़ात कोई बहुत पुरानी न थी, और न ही उसे मुकम्मल तौर पर ‘नई’ कहा जा सकता था।
Read Moreउससे मेरी मुलाक़ात कोई बहुत पुरानी न थी, और न ही उसे मुकम्मल तौर पर ‘नई’ कहा जा सकता था।
Read More”वो चेहरा… महज़ एक चेहरा नहीं था, बल्कि मेरे दिल की पूरी ज़मीन का मरकज़ , यानी केंद्र बन गया
Read More“गा लो, मुस्कुरा लो, महफिलें सजा लो, क्योंकि जीवन की डोर बड़ी कमजोर है” यह पंक्तियाँ मात्र शब्द नहीं बल्कि
Read Moreन रोक ए हम नवा अब मेरे आंसू,आंखों से ये समन्दर तो निकल जाने दे।जुल्फों की घनी छाओं की चाहत
Read Moreकॉलेज के वो दिन भी क्या ख़ूबसूरत होते हैं, जहाँ किताबों के पन्नों से ज़्यादा नज़रें हसीन चेहरों के मुताले
Read Moreदिल्ली की गलियां और वो पुर-असरार चेहरा पुरानी दिल्ली की वो तंग और तारीख़ (अंधेरी) गलियां, जहां हवाओं में आज
Read Moreकेरल के घने और हरे-भरे मन्नार के जंगलों के बीच से गुज़रती वह सड़क किसी भूल-भुलैया से कम न थी।
Read Moreआज हम उस युग में जी रहे हैं जिसे ‘डिजिटल क्रांति’ का नाम दिया गया है। सूचना का विस्फोट कुछ
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