ग़ज़ल
वादा तो कर गए मगर निभाये कौन। जलती है आग मगर इसे बुझाए कौन। अमीरे शहर की सब करते हैं हिमायत। मुफलिसी
Read Moreये आइनों का शहर है , खुशनुमा कितना, पत्थरों का यहाँ बाज़ार गर्म है कितना, उन के दीदार से मरीज़े इश्क़ पे
Read Moreसखियों ने जो तेरी पूछा तो बताना पड़ा मुझे । कई थे खत तेरे पास मेरे दिखाना पड़ा मुझे ।
Read Moreभूल पाओगे क्या . तुम सच बता दो हमको । नहीं तो फिर सलाह ये , हमें देते क्यों हो ? देखा
Read Moreहां आरज़ूओं की तरह था, मुझको तो वो तस्स्वुर में मिला था। दुनिया का उसे डर था, मुझसे वो ख़्वाबों
Read Moreरोशनी कुछ इस तरह आजकल मेरे घर में हुआ करतीं हैं। ख़ून की बूंदें,बनकर अश्क आंखों से गिरा करती हैं।
Read Moreमेहबुब मेरे इस तरह से अब हमको रुसवा न करो , मुहब्बत है, खेल नहीं है , तुम कोई तमाशा
Read Moreलोग तन्हाई में आँसू बहाते होंगेयाद कर मांजी को दिल भी जलाते होंगेमेरे मुकद्दर में उजाले की किरन कहाँलोग बेकार
Read Moreसुबह हो या शाम वो बस मसरूफ़ ही रहती है, इतवार हो या के कोई भी छुट्टी काम में लगी रहती
Read More