रेलवे स्टेशन
भीषण गर्मी की वह दोपहर थी। अपने शहर के छोटे-से रेलवे स्टेशन तक पहुँचते-पहुँचते ऐसा लगने लगा था, जैसे सूरज
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Read Moreएक खबर अखबार की सुर्खी बनी कि गुरुजी ने परीक्षा में एक बच्चे को नकल करने से रोक दिया। बच्चा
Read Moreचुनाव संपन्न हो चुके थे। लोकतंत्र का महाकुंभ अब “रिज़ल्ट दर्शन” की साधना में लीन था। टिकड़मों की ढोलक बज
Read Moreउस दिन बब्बन चाचा कुछ ज़्यादा ही प्रसन्न थे। चेहरे पर वही चमक थी, जैसी पुरानी अलमारी में अचानक मिले
Read Moreकहते हैं, शब्दों का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए। शब्द वो हथियार हैं जो घाव भी करते हैं और मलहम भी
Read Moreमेरे एक पक्के दोस्त थे। दुःख इस बात का नहीं है कि अब वो नहीं रहे! नहीं, दुनिया में तो
Read Moreचलो बुलावा आया है, दिल्ली ने बुलाया है। इनकी निगाहें दिल्ली पर टिकी हुई हैं। क्या नेता, क्या लेखक, क्या
Read Moreडांडिया का असली रंग-भाग 1शहर में डांडिया उत्सव का बुख़ार अपने चरम पर है। नवरात्रि के नौ दिन मानो मस्ती
Read Moreकोई मुझे बाहर निकालो, भाई! चार दिन से कार की पिछली डिक्की में पड़ा हूँ। मालिक भूल गए क्या? नर्सरी
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