एक नई कविता बनती है,
एक नई कविता बनती है, यहाँ सुर्योदय से सुर्यास्त तक सूर्य की किरणें बिखरती हैं, एक फार्म हाउस में एक
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Read Moreनये वर्ष का आज स्वागत हुआ है, सूरज भी आज बादलों में ओझल हुआ है, नये वर्ष के स्वागत में
Read Moreमेरी साहित्यिक यात्रा शीर्षक से मैं यहाँ एक यात्रा वृतान्त प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह मेरी पहली ही साहित्यिक यात्रा
Read Moreबारिश की बूंदे मन को स्पर्श कर रही है, लगता है वह भी भीड़ में अपनों से बिछड़ रही है
Read Moreजिन्दगी खामोश है ठहर सी गई है, रंगमंच खाली पड़ा है, वक्त यूंही निकल रहा है, मेरी कलम नहीं ठहरी
Read Moreबारिश की बूँदें मन को स्पर्श कर रही है, लगता है वह भी भीड़ में अपनों से बिछड़ रही है,
Read Moreजिन्दगी खामोश है ठहर सी गई है, रंगमंच खाली पड़ा है, वक्त यूं ही निकल रहा है, मेरी कलम नहीं
Read Moreपरछाई भी हूँ और मैं तेरा हौसला भी हूँ, कोई साथ नहीं पर हर कदम मैं तेरे साथ हूँ, तेरे
Read Moreये जिन्दगी जो मुझे मिली, कल तक थी जो महफिल वो आज खाली मिली, नफरत की जो राह थी वो
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