Author: *डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा

कथा साहित्यलघुकथा

फर्क तो पड़ता है

फर्क तो पड़ता है दौड़ते-भागते शर्मा जी जैसे ही ऑफिस पहुँचे डायरेक्टर के मुहलगे चपरासी ने उन्हें बताया- “सर ने

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