अनुभूति
वह तख्त अभी भी पड़ा है उसी कमरे में जिस पर कभी लेटती थीं अम्मा हमेशा, बांचती थीं सुख सागर
Read Moreअम्मा यह सच है कि तुम नहीं हो मेरे साथ अब सदेह साकार त्याग कर स्थूल काया हो गयी हो
Read Moreमां कुछ दिवस और रहकर जाती। कुछ तो मुझसे तुम कहकर जाती।। माया पट बांच अबोले मुझसे। प्रकृति-पुरुष रहस्य खोले
Read Moreबिजली चली जाने से उदास हैं रसोई के दो हाथ सोच रहा है कोई कोना अब कैसे पिसेगी मूंग-दाल कैसे
Read Moreगीत जीवन्त समाज के परिचायक होते हैं। समाज-जीवन एवं लोक व्यवहार में गीत रचे-बसे हैं। समाज में धार्मिक संस्कारों का
Read Moreअंतरमन का सब तमस मिटे। जग सघन अंधेरा कलुष हटे।। सुख-शांति धरा में हो हर पल, हिंसा के बंधन सहस
Read Moreनयन तीर से घायल उर पीड़ा घाव भरा। स्नेह लेप लगा प्रिये, दो सम्बल छांव भरा। एक बार देख सखी
Read Moreपुस्तक ‘पहला अध्यापक’ शिक्षा पर केद्रित उन तमाम महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है जो पाठकों के सामने न केवल
Read Moreमत रोको गंगा की धारा, अविरल बहने दो। उर की सारी पीड़ा खुशियां, कल-कल कहने दो। केवल नदी नहीं है
Read Moreशिक्षा जीवन को संवारती है, गढ़ती है। इस मायने में किसी व्यक्ति के जीवन में प्राथमिक शिक्षा का महत्व सर्वोपरि
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