धरती पर न रहे अंधेरा
बाहर दीप जलाने से पहले, अंतर्मन में इक दीप जला लें। नेह सुधा-जल से अभिसिंचित कर, बंजर मन में रस,
Read Moreबाहर दीप जलाने से पहले, अंतर्मन में इक दीप जला लें। नेह सुधा-जल से अभिसिंचित कर, बंजर मन में रस,
Read Moreगत शताब्दी के प्रारंभ में देश के राजनीतिक फलक पर एक युगांतरकारी घटना हुई जिसने देश-दुनिया को प्रभावित किया। वह
Read Moreउपवन की शोभा बढ़ती जब, खिलते पाटल और लिली हैं। स्नेह-भाव पाकर अपनों का, अधरों पर मुस्कान खिली है। प्रेम
Read Moreहम एक नया संसार बनायें। न ढलें अश्रु नयनों से, स्वप्न पलें। सुख-दुख में शामिल, बन दीप जलें। मानव-मन के
Read Moreमानव जीवन कभी एकांगी और एकरस नहीं होता है। उसमें जीवनानुभवो के विविध पक्ष एवं इंद्रधनुषी रंग समाये होते हैं।
Read Moreअच्छी बात हमें सिखाते, टीचर जी। मेहनत से खूब पढ़ाते, टीचर जी।। मोती से दांत चमकते, आंखे तेज। पान-मसाला नहीं
Read More24 सितम्बर 1861 को मुम्बई के एक व्यापारी पारसी परिवार में माता जैजीबाई की कोख से एक बच्ची का जन्म
Read Moreलालिमा सुशोभित मुखमंडल में उनके, अपूर्व सौंदर्य नख-शिख में समाया है। व्याकुल हृदय को लुभाते हैं कंज नयन, वाणी में
Read Moreओढ़ ली चूनर धानी वसुधा ने आज फिर धरती न धीर मन मौन इतराती है। अंबर नत होकर चूमता कपोल
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