विज्योति
बहुत मुद्दत के बादउकेरे है कुछ लफ्ज़हृदय आघात से बचाकरकिताब-ऐ- पन्नों पर। बहुत मुद्दत के बादअंकित किए हैं कुछ किस्सेहृदय
Read Moreसोच न बंदे गंदगीतु कर ले ईश्वर की बंदगी। यही तो जीवन की मर्यादा हैतु खुद का ही भाग्य विधाता
Read Moreआओ हम स्कूल चलेनव भारत का निर्माण करें। छूट गया है जोबंधन भव काआओ मिलकर उसकोपार करें,आओ हम स्कूल चले
Read Moreआओ कभी फिर विद्यालय कीदहलीज पर दोबारातुम्हें वह सब नये -पुरानेख्वाब मिलेंगे। आओ कभी फिर शिक्षालय कीदेहली पर दोबारातुम्हें शिक्षक
Read Moreसब कुछ बदल जाता हैवक़्त के साथप्रतिष्ठा, परंपरा, मर्यादामगर नहीं बदलताव्यक्ति का व्यक्तित्व। सब कुछ चला जाता हैवक़्त के साथअपने,पराये,हमराहीमगर
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