भूतकाल
धीरे-धीरे बहुत सेचेहरे आलोप हो रहे हैंदेखता था जिनको बचपन से।धीरे-धीरे वो सब आवाज़ेखामोश हो रही हैसुनता था जिनको लड़कपन
Read Moreसब कुछ बदल जाता हैवक़्त के साथप्रतिष्ठा, परंपरा, मर्यादामगर नहीं बदलताव्यक्ति का व्यक्तित्व। सब कुछ चला जाता हैवक़्त के साथअपने,पराये,हमराहीमगर
Read Moreबहुत कुछ लिखते हैं लिखने वालेमगर लिख नहीं पातेअपने गुनाहों को कभी।बहुत कुछ कहते हैं कहने वालेमगर कह नहीं पातेअपने
Read Moreतुम कितनी भी कोशिश करोबिखराने की हमेंहम बिखर कर भीफिर से जुड़ जाएगे। तुम कितनी भी कोशिश करोजलाने की हमेंहम
Read Moreउठो देश के लोगोंखुद के अधिकारों कोज़रा एक बार पहचानो।निकलकर झूठे किरदारों सेखुद के व्यक्तित्व कोज़रा एक बार निखारो।सत्ता सत्ताधारियों
Read Moreनन्ही नन्ही गुड़ियां आईचाँद सितारे साथ है लाई।दो चोटियां बनाकर आईदेखकर उसकोसबके चेहरा पर मुस्कुराहट आई।लाल-लाल गालों से मुस्कुरातीदूध जैसे
Read Moreकांगड़ा,हिमाचल प्रदेश जैसे कि हम जानते हैं कि 12 जनवरी को पूरे भारतवर्ष में स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य
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