Author: रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

कुण्डली/छंदपद्य साहित्य

लगता मुझे है अब,बहकने वाले हैं (मनहरण घनाक्षरी छन्द)

चाँदनी चमक लिए,चाहने की चाह लिए दिल में चाहत भरा,क्यों लिये चल रहीं। बाल तेरे काले काले,चाल तेरे हैं निराले

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अन्य

नाटक – समझौता (सत्य घटना पर आधारित)

पात्र परिचय -: राकेश -सहायक शिक्षक राज- सहायक शिक्षक कविन्द्र- सहायक शिक्षक दिपक-प्रधान शिक्षक हिरा- विशेष पदाधिकारी (चयनित) विवेक -बरिष्ठ

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ब्लॉग/परिचर्चालेख

साहित्यकार का समाज के प्रति दायित्व

समाज से साहित्य,साहित्य से साहित्यकार,साहित्यकार से समाज एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए हैं जैसे कौई तीन पहिये वाली गाड़ी

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