सरस्वती वंदना
वीणावादिनी ज्ञान दायिनी ज्ञानवान कर दे…. माँ रूपसौभग्यदायिनी नव रुप भर दे…. जीवन में नव रस नव गीत नव स्वर
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Read Moreचाँदनी चमक लिए,चाहने की चाह लिए दिल में चाहत भरा,क्यों लिये चल रहीं। बाल तेरे काले काले,चाल तेरे हैं निराले
Read Moreपात्र परिचय -: राकेश -सहायक शिक्षक राज- सहायक शिक्षक कविन्द्र- सहायक शिक्षक दिपक-प्रधान शिक्षक हिरा- विशेष पदाधिकारी (चयनित) विवेक -बरिष्ठ
Read Moreसमाज से साहित्य,साहित्य से साहित्यकार,साहित्यकार से समाज एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए हैं जैसे कौई तीन पहिये वाली गाड़ी
Read Moreदिवाली कैसे मनाऊँ दीया तो बना लिया ईश्वर के निशुल्क दिये मिट्टी और पानी से इसमें तेल कहाँ से लाऊँ
Read Moreपुतले,पुतले चहूँ ओर पुतले निर्जीव की भेष में सजीव के भेष में लेकिन दोनों कहलाते पुतले करते कार्य अजीबोग़रीब निर्जीव
Read Moreअप्रत्यक्ष रूप से सहयोग के नाम पर कहते हैं लोग- पैसा दीजिएगा रचना को जगह मिलेगी नहीं दीजिएगा प्रकाशित नहीं
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