।। दलित दलितहि लखै ।।
किसने देखा मुझे..? फटे-चीथड़ों में मनु-मरूभूमि में अधनंगे भटकता था मैं रेगिस्तान की रेत चहुँओर कड़ी धूप में भूख और
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Read More।। जला देंगे..।। यही था हमारा सर्वश्रेष्ठ मध्यम मार्ग जो अनादि काल का उन्नायक जीवन एक दूसरे के साथ जिस
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Read Moreसमाज शब्द का अर्थ है – समान कार्य करनेवालों का समूह या विशेष उद्देश्य की पूर्ति केलिए संघटित संख्या। मानव
Read Moreघेरे हुए थे मुझे चारों ओर से पीड़ामय जग के सारे बादल काले अपनी अँधेरी झोंपड़ी में अकेले बैठा मैं
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