“उलझे हुए सवालों में”
उग आये शैवाल गाँव के तालों में पेंच फँसें हैं उलझे हुए सवालों में करूँ समर्पित कैसे गंगा जल को
Read Moreउग आये शैवाल गाँव के तालों में पेंच फँसें हैं उलझे हुए सवालों में करूँ समर्पित कैसे गंगा जल को
Read Moreसम्बन्धों का है यहाँ, अजब-गजब संसार। घरवाली से भी अधिक, साली से है प्यार।। — अपनी बहनों से नहीं, करते
Read Moreबात करते हैं हम पत्थरों से सदा, हम बसे हैं पहाड़ों के परिवार में। प्यार करते हैं हम पत्थरों से
Read Moreधक्का-मुक्की रेलम-पेल। आयी रेल-आयी रेल।। इंजन चलता सबसे आगे। पीछे -पीछे डिब्बे भागे।। हार्न बजाता, धुआँ छोड़ता। पटरी पर यह
Read Moreधूप और बारिश से, जो हमको हैं सदा बचाते। छाया देने वाले ही तो, कहलाए जाते हैं छाते।। आसमान में
Read Moreसम्बन्धों की दुनियादारी, अनुबन्धों की बात करो। सपने कब अपने होते हैं, सपनों की मत बात करो।। लक्ष्य नहीं हो
Read Moreसूरज चमका नीलगगन में, फिर भी अन्धकार छाया धूल भरी है घर आँगन में, अन्धड़ है कैसा आया वृक्ष स्वयं
Read Moreबचा हुआ जो नेह है, उसको रहा सहेज। बुझने से पहले दिया, जलता कितना तेज।। क्या जायेगा साथ में, करलो
Read Moreतुमको शत्-शत् मेरा प्रणाम। श्रद्धा-सुमन समर्पित तुमको, जग में अमर तुम्हारा नाम।। हे व्रतधारी-संयमी तुम्हारी, महिमा को हम गाते हैं।
Read Moreबादल मचा रहे हैं शोर। नाच रहा जंगल में मोर।। बहुत डराते काले बादल। लेकिन मोर हुए हैं पागल। बदरा
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