स्त्रियाँ लौटती नहीं
दो जहान में पिसती है दहलीज जब लाँघती है रिवाजों,रस्मों की बेड़ियां अपने पैरों में बाँधती है छुट जाता है
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Read Moreमेरी माँ मर गई है,उसे शमशान तक सजा-धजाकर ले जाने की तो सामर्थ्य नहीं है मुझमें,आखिर क्या करूँ..? जो इस
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