आत्मा की मुक्ति
मेरी माँ मर गई है,उसे शमशान तक सजा-धजाकर ले जाने की तो सामर्थ्य नहीं है मुझमें,आखिर क्या करूँ..? जो इस
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Read Moreअरसे बाद गाँव की गलियों में कदम रखते ही बच्चे ,बुढ़े सब उसे टकटकी निगाहों से देख रहे थे अरे!
Read Moreरुपा की डिलिवरी के समय भी काफी दिक्कतें आई थी…और अब तो उसे अपने बच्चे के लिए हमेशा ही साथ
Read Moreविभा की विवाह की तैयारियाँ शुरु हो चुकी थी,सभी अपने में मग्न जैसे समय ही कम पड़ रहा हो. विभा
Read Moreगाँव मोहल्ले में चुनाव की चर्चा जोर शोर से चल रही थी। “भाई !अबकी टिकट किस आधार पर मिलेंगे अवतार
Read Moreढाई बरस का मंकू भूख के कारण बार बार अपनी माँ लाली को झिंझोड़ रहा था , पर पास बैठी लाली
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