लघुकथा : गिरवी
“रामदीन! रामदीन!,अरे कहाँ हो?” “भाई,नाम पुकारा जा रहा है तुम्हारा।” “जल्दी आओ! निकल जायेंगे डॉक्टर साहब।” पर्ची बनाने वाला फीस
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