चौपाई
नेता देखो करते खेला।नीत नियम गटकें गुरु -चेला।।संविधान की कसमें खाते।जनता को हैं मूर्ख बनाते।। जनता को वे मूर्ख बनाते।मुफ्त
Read Moreहे ज्ञान की देवी मातु शारदेहम पर तनिक कृपा कर दो,मुझ पर भी थोड़ी दया कर दोहमको भी ज्ञान का
Read Moreधधक रही है सूर्य ताप से दोपहरीआकुल व्याकुल हैं जनमानसपशु-पक्षी, जीव जंतु, कीड़े मकोड़ेपेड़ पौधे और वनस्पतियाँ।सूख गये सब ताल
Read Moreआज संविधान दिवस हैआप सभी को बहुत बहुत बधाइयां हैं,इस अवसर पर कुछ तथ्य आपसे साझा करता हूँभारत का संविधान
Read Moreरायबरेली काव्य रस साहित्य मंच का प्रथम भव्य राष्ट्रीय आयोजन दिनांक 5 मई को ‘कलश उत्सव लान’ में आयोजित किया
Read Moreवाह हहहहहहह! जनाबआपका भी जवाब नहीं,एक तो आप खुद ‘मैं’ से दूर भी नहीं होना चाहतेऔर ‘मैं’ से ही जाने
Read Moreआप कह रहे हैं कि हम जी रहे हैंचलिए मान लिया अच्छा कर रहे हैंपर कौन सा तीर मार रहे
Read Moreगोण्डा (उत्तर प्रदेश): जिले के वरिष्ठ कवि साहित्यकार देहदानी सुधीर श्रीवास्तव को सुदीर्घ हिंदी सेवा में अनुकरणीय योगदान हेतु ‘काशी
Read Moreमेरी माटी की महिमा अपार हैजान रहा इसे सारा संसार है,भिन्न भिन्न है बोली वाणीअरु भिन्न भिन्न परिधान है। बहुरँगी
Read Moreहमें गर्व है अपनी मातृभूमि परजाति -धर्म, भाषा, संस्कार, तीज, त्योहार, परिवेश परविकास के बढ़ते आयाम, सम्मान स्वाभिमान पर।हमें गर्व
Read More