गीत/नवगीत *वर्षा वार्ष्णेय 16/08/2018 दौर महाकवि नीरज जी को दिल से नमन 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 वो दौर भी अजीब था , खिले खिले थे फूल से Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 16/08/2018 आह आह की तुम बात न करो , आंसुओं को कब भिगो पाया है जहां बहती ही रही नदी निस्वार्थ भाव Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 27/07/201828/07/2018 मोहब्बत बैरन धूप और रक्त की छांव पर गुरूर क्या करना , तन्हाई के सबब को यूँ सरेआम बयान क्या करना Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 27/07/2018 एक इंच मुस्कान एक इंच मुस्कान मिल जाती है डेली , ख्यालों में यूँ ही तुम्हे सोचते हुए , साथ जीने के लम्हे Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 27/07/2018 बरसात जीने का सबब जगाती है ये बरसात , बिन मौसम के भी आ जाती है बरसात । कहीं पर Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 13/07/201815/07/2018 दुनिया आह की तुम बात न करो , आंसुओं को कब भिगो पाया है जहां बहती ही रही नदी निस्वार्थ भाव Read More
लेखसामाजिक *वर्षा वार्ष्णेय 18/06/201818/06/2018 अवसाद जिंदगी भी कितने रंग बदलती है ।जब भी हम सोचते हैं कि सब कुछ अच्छा चल रहा है ,अचानक एक Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 18/06/2018 प्रीत नेह लगाकर भूल गए क्यों पास बुलाकर दूर गए क्यों। मैं तो तुम्हरी प्रीत बाबरी , वंशी बजाकर छोड़ गए Read More
गीतिका/ग़ज़ल *वर्षा वार्ष्णेय 13/06/2018 जज्बात जज्बातों में भीगा हुआ कुछ तन्हा सा मुकाम था कुछ लफ्ज थे उलझे हुए कुछ तन्हाई का पैगाम था समझाया Read More
कविता *वर्षा वार्ष्णेय 13/06/201823/06/2018 ख्यालात उलझे उलझे से ख्यालात कर जाते हैं बैचैन मुझे , खुश रहने की जिद में और भी उलझ गयी जिंदगी Read More