बाल कहानी

बालकहानी : वनदेवी

जैसे ही शिखर को पता चला कि चंदा हथिनी के दल का एक बुजुर्ग हाथी तालगाँव के समीप नर्रा जंगल में अपने दल से बिछुड़ कर इधर-उधर भटक रहा है ; वह तुरंत , ‘ हाथी देखने जा रहा हूँ दीदी… ‘ , कहते हुए विभा के मना करने के बावजूद घर से निकल पड़ा। […]

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बाल-कहानी – पुरस्कार

रोज की तरह आज भी शाला में प्रातः कालीन राष्ट्रगान चल रहा था।इसके बाद बच्चों को सम्बोधित करते हुए प्रार्थना प्रभारी मास्टर ने प्रेरक वाक्य के लिए राजू !रामू!गोपाल! कहके पुकारा पर कोई तैयार नहीं हुए। पीछे से राजू ने कहा- “मास्टर जी आज हम लोगों ने कोई तैयारी नही की है।अतःआप से निवेदन है […]

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बालकहानी- बिट्टू बंदर ने की मदद

कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। साँझ होते ही जंगल के सभी जानवर अपने-अपने घरों में दुबक जाते थे। ऐसा लगता जैसे कि जंगल भर बदन कँपकँपाती हवा का पहरा हो। छोटे बच्चों को घर से बाहर निकलने की बिल्कुल इजाजत नहीं थी। अगर कोई गलती से बाहर निकल जाता, तो उसे अपने मम्मी-पापा की […]

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बालकहानी : सोना समझ गयी

“मैं बहुत थक गयी हूँ। अब एक कदम भी नहीं चला जाता है मुझसे। सुबह से शाम तक बस; सिर्फ काम ही काम। सुनिए जी, आज मैं घर पर ही रहूँगी। आप जाइये काम पर।” नन्हीं चींटी सोना ने अपने पति डंबू से कहा।           डंबू ने सोना को चिढ़ाते हुए […]

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कर्म और भाग्य (बाल कहानी )

बहुत समय पहले की बात है, चंदनपुर गाँव में जयवीर नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत दयालू, दानवीर साधू संतो की पूजा करने वाला धर्मरत इंसान था। उसके एक पुत्र था। जिसका नाम प्रज्ञ था। प्रज्ञ बहुत होशियार बच्चा था। पढ़ने में उसका बहुत मन लगता था। वह अपनी कक्षा में अव्वल आता […]

बाल कहानी

बालकहानी – इस बार की दीवाली

नरेश कक्षा आठवीं का छात्र था। उसकी दो बहनें थीं- जयंती और नंदनी। वह सबसे छोटा था। माँ-बाप खेती-किसानी करते थे। अल्प वर्षा के कारण इस साल फसल अच्छी नहीं थी। वैसे भी घर की आर्थिक स्थिति पहले से खराब थी। जैसे भी हो, बस गुजर-बसर हो रहा था। दीपावली का त्यौहार आया। दीपावली की […]

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बालकहानी : श्रीराम का अभिनय

हर साल की तरह इस साल भी दशहरा के अवसर पर श्रीरामलीला का मंचन होना था। आसपास के क्षेत्र में हायर सेकेण्डरी स्कूल जबकसा के श्रीरामलीला मंचन कार्यक्रम की बड़ी ख्याति थी। आज सांस्कृतिक प्रभारी शिक्षक अरुण यादव जी ने बच्चों को मंचन हेतु पात्रों की भूमिका सौंप दी। सब अपनी-अपनी भूमिका से संतुष्ट और […]

बाल कविता बाल कहानी

मोहन का बछड़ा (बाल कथा गीत)

मोहन अपना छोटा बछड़ा, एक दिवस ले खेत गया, इधर-उधर वह लगा खेलने, खेलते-खेलते चौंक गया. मक्खी एक बड़ी तेजी से, भाग रही, मोहन बोला, “मक्खी रानी, क्यों भगती हो, किससे डर है तुम्हें भला?” मक्खी बोली, “पीछे देखो, मैं उससे डरकर भागी”, मोहन ने मुड़ पीछे देखा, चिड़िया भी डरकर भागी. “छोड़ो उस छोटी […]

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बादल और बच्चे

सावन का आठवाँ दिन था। सुबह की स्वर्णिम धूप बड़ी रमणीय थी। दोपहर होते तक वातावरण उमस हो गया। शाम तक नीलगगन में बदली छा गयी। अंधेरी रात और अधिक घनी होने लग गयी। मध्य रात को तेज हवा चलने लगी। आकाश में छाए बादलों के टुकड़े हिलने-डुलने लगे। न चाहते हुए भी उन्हें इधर-उधर […]

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प्रतिभा

मुकेश को “वीडियो गेम सृजन प्रतियोगिता” में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था. उसके गेम को यू.ट्यूब ने खरीद लिया था, उसे 20 लाख रुपए का चेक मिला था. मुकेश तो बहुत खुश था ही, मुकेश के माता-पिता भी बहुत खुश थे. बधाई देने के लिए दोस्तों और नाते-रिश्तेदारों के फोन भी बराबर आ रहे थे. […]