कविता

हाइकु-लेखनी

लेखनीकार,
लयबद्ध संसार,
सत्य विचार।

लिखे कलम,
सच्चाई का आलम,
बेरोक टोक।

विधि लेखनी,
मिटाये नही मिटे,
सत्य घटित।

दिनेश”कुशभुवनपुरी”

2 thoughts on “हाइकु-लेखनी

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छी हाइकु !

  • गुरमेल सिंह भमरा लंदन

    हाइकु बहुत सुन्दर .

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