गीत/नवगीत

हज़ार गीत सावनी/बरखा गीत/

हज़ार गीत सावनी, रचे सखी फुहार ने,
झुलाएँ झूल झूमके, लुभावनी बहार में।

विशाल व्योम ने रची,
सुदर्श रास रंग की,
जिया प्रसन्न हो उठा,

फुहार में उमंग की।

मयूर मस्त नृत्य में किलोलते
 कतार में,
अमोघ मेघ रागिनी, 
सुना रहे मल्हार में।

चढ़ी लता छतान पे,
बगान को चिढ़ा रही,
वसुंधरा, हरीतिमा, 

बिखेर मुस्कुरा रही।

खिले गुलाब झुंड में, झुकी डगाल भार में,
कली-कली हुई विभोर, मौसमी बयार में।

दिखी अधीर कोकिला,
कुहू कुहू पुकारती
सुरम्य तान छेडके,

दिशा दिशा निहारती।

कहीं सुदूर चंद्रिका, घनी घटा की आड़ में,
कभी दिखी कभी छिपी, धुली हुई फुहार में।

सजीं पगों में पायलें,
कलाइयों में चूड़ियाँ,
मिटा गईं ये बारिशें,

दिलों की तल्ख दूरियाँ

बढ़ी नदी उमंग से, बहे प्रपात धार में,
मनाएँ पर्व आ सखी, अनंत के विहार में

 

-कल्पना रामानी

परिचय - कल्पना रामानी

परिचय- नाम-कल्पना रामानी जन्म तिथि-६ जून १९५१ जन्म-स्थान उज्जैन (मध्य प्रदेश) वर्तमान निवास-नवी मुंबई शिक्षा-हाई स्कूल आत्म कथ्य- औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद मेरे साहित्य प्रेम ने निरंतर पढ़ते रहने के अभ्यास में रखा। परिवार की देखभाल के व्यस्त समय से मुक्ति पाकर मेरा साहित्य प्रेम लेखन की ओर मुड़ा और कंप्यूटर से जुड़ने के बाद मेरी काव्य कला को देश विदेश में जाना गया। मेरी गीत, गजल, दोहे कुण्डलिया आदि छंद-रचनाओं में विशेष रुचि है और रचनाएँ पत्र पत्रिकाओं और अंतर्जाल पर प्रकाशित होती रहती हैं। वर्तमान में वेब की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘अभिव्यक्ति-अनुभूति’ की उप संपादक। प्रकाशित कृतियाँ- नवगीत संग्रह “हौसलों के पंख”-अंजुमन प्रकाशन।(पूर्णिमा जी द्वारा नवांकुर पुरस्कार व सम्मान प्राप्त) नवगीत संग्रह-'खेतों ने खत लिखा'-अयन प्रकाशन एक गज़ल संग्रह 'मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी'-अयन प्रकाशन ईमेल- kalpanasramani@gmail.com

2 thoughts on “हज़ार गीत सावनी/बरखा गीत/

  1. वाह बहुत की मनोरम ह्रदयस्पर्शी काव्य पंक्तियों के लिए आभार

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