कविता

भाई बहन का पावन पर्व

{भाई बहन का पावन पर्व}

भ़ईया की शुभ संदेश लाया सावन की पुनम।
भाई-बहन का पावन पर्व आया रक्षा बंधन।।

भ़ईया तेरे जीवन में कभी खुशी न हो फिका,
तेरे माथे पे लगाई आज मैंने मंगल टीका,
तेरी आरती उतारुं करुं तेरा मूँह मीठा,
बाँधूं कलाई पे राखी करे हर विघ्न से रक्षा,
ऐसा भाई बनना कि तुझपे नाज करे हर बहन।
भाई-बहन का पावन पर्व आया रक्षा बंधन।।

इस राखी को न तुम समझना सिर्फ तार,
ये राखी तो है बहन की रक्षा का अधिकार,
नहीं चाहिए पायल कंगन न माँगू सोने का हार,
तेरा प्यार यूंही बना रहे यही माँगू उपहार,
तू खुशी है तू जीत है तुही मेरा रतन।
भाई बहन का पावन पर्व आया रक्षा बंधन।।

तेरा जब आशिष है फिर जमाने से क्या डर,
भगवान करे लगे तुझे तेरी खुशी और उमर,
काँटा न आये राहों में मिले फूलों की डगर,
बहन हो जाये पराया पर तेरे दिल में हो बसर,
खुशबू फैलाना भैया बनके तुम चंदन।
भाई-बहन का पावन पर्व आया रक्षा बंधन।।

-दीपिका कुमारी दीप्ति

दीपिका कुमारी दीप्ति

मैं दीपिका दीप्ति हूँ बैजनाथ यादव की नंदनी, मध्य वर्ग में जन्मी हूँ माँ है विन्ध्यावाशनी, पटना की निवासी हूँ पी.जी. की विधार्थी। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।। दीप जैसा जलकर तमस मिटाने का अरमान है, ईमानदारी और खुद्दारी ही अपनी पहचान है, चरित्र मेरी पूंजी है रचनाएँ मेरी थाती। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी।। दिल की बात स्याही में समेटती मेरी कलम, शब्दों का श्रृंगार कर बनाती है दुल्हन, तमन्ना है लेखनी मेरी पाये जग में ख्याति । लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।।

2 thoughts on “भाई बहन का पावन पर्व

  • विभा रानी श्रीवास्तव

    सुंदर रचना

  • शशि शर्मा 'ख़ुशी'

    बहुत सुंदर सृजन |

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