कुण्डली/छंद

सवैया छंद : सुमुखी

रहूँ तुझ आपनि जानि प्रिए, तुम बूझत नाहिं बुझावत हो।
अंसुवन काढ़ि निकारि जिया कस नैनन नेह लगावत हो॥

ऊष्मावत हो बहलावत हो, नहिं जीवन छांह दिखावत हो।
हटो न कपोल किलोल करो, तजि लाज वफा शरमावत हो॥

 

विचारि लियो मन धारि लियो, बरबाद न यौवन यां  करिहों।
मनाय दियो समझाय लियो, बिन रीत कुरीति दगा धरिहों॥

विश्वास भरो कर मांग वरो, कस पाँव महावर वा डरिहों
बताय दियो मन मंगल मोर, थिरात न पाँव सखा धरिहों॥

महातम मिश्र

*महातम मिश्र

शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल- अहमदाबाद में भारत सरकार में सेवारत हूँ

2 thoughts on “सवैया छंद : सुमुखी

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छे छंद !

    • महातम मिश्र

      सादर धन्यवाद आदरणीय, बहुत दिनों बाद आप का आशीष पा मन गदगद हो गया, आभार

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