लघुकथा

लघुकथा- असफलता में सफलता

यशवंत को लिखने का जैसे भूत सवार हो। यशवंत कहता था- एक दिन मैं बहुत बड़ा लेखक बनूगा। ‘देख लेना मेरी कहानियों पर फिल्में बनेगी और मेरे लिखे गए गाने फिल्मोँ मे आऐगे। पत्रिकाओं और अखबारों में मेरे बारे में छपेगा।’
यशवंत की ये बातें कोई सुनता तो सब हँस पड़ते और कहते- ‘हाहाहा ये बनेगा बड़ा लेखक इसकी कहानियों पर बनेगी फिल्में।’
यशवंत खुद पर हसने वालों पर कभी तीखा नहीं बोला क्यों! पता नही।
यशवंत ने की पत्र पत्रिकाओं में अपनी रचनाए दी लेकिन
यशवंत को हर बार ‘नहीं हो सकता’ जैसे सौदों खा सामना करना पड़ता, लिखने यसवते ने हार नहीं मानी और लगातार अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ता रहा। यशवंत की कहानियों और गानों में उसकी भावनाओं की आवाज शायद किसी डायरेक्टर संगीतकार तक नहीं पहुँची।
यशवंत को जुनून था आगे बढ़ने का, अपना सपना सच करने का।
यशवंत लिखता रहा……लिखता रहा….. हार मिलती रही लेकिन वह लिखता रहा।
यशवंत के बुलंद हौसलो के आगे आखिरकार वक्त की रफ्तार धीमी पड़ गयी और असफलता ने हार मान ही ली।
एक संगीतकार को यशवंत का गाना इतना बेहतर लगा कि उसने अपने एलबम के लिए यशवंत के गाने को चयनित कर लिया और जैसे ही गाना मार्केट में आया दशकों के बीच एक खास पहचान बना ली।
सोने पे सुहागा वाली कहावत सही हुई क्योंकि वहीं दूसरी ओर यशवंत की एक कहानी लघु फिल्म के लिए चयनित हो गयी।
अब तो यशवंत के पास आफ़रो की लाइन लग गयी। समय आगे बड़ा और एक दिन वो आ ही गया जब यशवंत का सपना सच हुआ। यशवंत की कहानी पर एक फीचर फिल्म बनने जा रही है।
आखिरकार यशवंत ने असफलता में सफलता को ढूंढ ही लिया और ये सब हुआ आगे बढ़ने की सोच के साथ। हार न मानते हुए आगे बढ़ते रहने के कारण। यशवंत आज भी यही कहता है-
असफलता मे ही सफलता है बस जरूरत है तो सिर्फ आगे बढ़ते रहने की ।

— विकाश सक्सेना

One thought on “लघुकथा- असफलता में सफलता

  • विजय कुमार सिंघल

    अच्छी और प्रेरक लघुकथा !

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