कविता

कविता : रंग

रंगो भरी खुशियाँ बिखेरने आई ये होली
सब में प्यार बाँटने आई ये होली
मगर रंगो में कुछ फीका है
सच्चाई के नाम पर धोका है
खुशियों में भी गम ज्यादा है
रंगो में छुपा ये झूठ
ढूंढते पर भी नज़र नही आता
हम पर गम का रंग डाल कर
फिर छुप जाता है
मगर ये रंग है
जो हर रंगहीन को रंगीन बना देते हैं
हर दिल में छिपी उदासी को शरारत बना देते हैं
नमी में हंसी के फूल खिला देते हैं
रंगो में धोखे पिचकारीयाँ लाख चलाओ
लेकिन ये रंग सच झूठ का अंतर बता देते हैं
तो आओ खेलते हैं दिल के रंग से
जिसमें न कोई धोखा न कोई छल
सब के चेहरो पर खुशियों के फूल
ऐसी है मेरी होली
यही हैं मेरे दिल के रंग
अक्षित शर्मा
कोबे, जापान

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