कविता

अनबूझ पहेली

मैं अनबूझ पहेली हूँ
खुद की ही सहेली हूँ
होते हैं सभी संग मेरे
लाखों में भी अकेली हूँ

तेरी यादों को बुनती
हर लम्हे को चुनती
नहीं तूने साथ दिया
ये सोच के हू घुनती ।

जब तुझको बुलाती हूँ
मैं खुद को भुलाती हूँ
तू फिर सपनों में आएगा
यू खुदको बहलाती हूँ ।

एक बार तुम आ जाओ
कुछ ख्वाब सजा जाओ
मुझे बाँहो में भरकर
एक आस जगा जाओ ।

तुझे देर हो गयी तो
मैं राहो में खो गयी तो
मुझे ढूंढ ना पाओगे
मौत के पहलू में जो गयी तो ।

अब भी समय है बाकी
मैं नहीं हूँ तेरी साकी
ये जो जाम गिर गया तो
पछतावा ही है बाकी ।

तू ही आरजू है मेरी
तू हर खुशी है मेरी
जाना है दूर तू जा
मोहब्बत तू है मेरी ।

अनुपमा दीक्षित मयंक

परिचय - अनुपमा दीक्षित भारद्वाज

नाम - अनुपमा दीक्षित भारद्वाज पिता - जय प्रकाश दीक्षित पता - एल.आइ.जी. ७२७ सेक्टर डी कालिन्दी बिहार जिला - आगरा उ.प्र. पिन - २८२००६ जन्म तिथि - ०९/०४/१९९२ मो.- ७५३५०९४११९ सम्प्रति - स्वतंत्र लेखन छन्दयुक्त एवं छन्दबद्ध रचनाएं देश विदेश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रो एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित प्रकाशाधीन पुस्तकें - लेकिन साथ निभाना तुम (खण्ड काव्य ) शिक्षा - परास्नातक ( बीज विग्यान एवं प्रोद्योगिकी ईमेल - adixit973@gmail.com

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