कविता

सुधर जा पाकिस्तान

{बनेगा दूसरा हिंदुस्तान}

वक्त है अभी माफी माँगकर सुधर जा पाकिस्तान,
वरना तेरे जमीं पे बनेगा दूसरा हिंदुस्तान।

वसुधैव कुटुम्बकम् का हम तो पाठ पढ़ाने वाले हैं,
भारत माँ पे जो आँख उठाये हम उसे मिटाने वाले हैं।

हमारी जमीं से अलग हुआ था हमनें तुझको भाई माना,
आतंक का बीज बोनेवाला दोस्ती का मूल न पहचाना।

तो देखना इस आतंक का अब क्या होगा अंजाम,
इतिहास बनेगा पर भूगोल में नहीं होगा तेरा नाम।

भौंकने वाले कुत्ते शेर के एक दहाड़ से डर गया,
रणभेरी सुनकर ही क्यों आँखों में आँसू भर गया।

काला दिन तू रोज मनाओ हम खत्म करेंगे आतंक को,
उसके बाद हम साफ करेंगे जयचन्द के भी वंशज को।

भगत सुभाष आजाद का जब खून रगों में खौलेगा,
हर पाकिस्तानी डर से फिर जय भारत माँ बोलेगा।

अरे मूर्ख पाक सम्हल जा सीमा पे शेर पहरेदार है,
मिनटों में तुझे मिटा देगा एक इसारे का इंतजार है।

– दीपिका कुमारी दीप्ति

दीपिका कुमारी दीप्ति

मैं दीपिका दीप्ति हूँ बैजनाथ यादव की नंदनी, मध्य वर्ग में जन्मी हूँ माँ है विन्ध्यावाशनी, पटना की निवासी हूँ पी.जी. की विधार्थी। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।। दीप जैसा जलकर तमस मिटाने का अरमान है, ईमानदारी और खुद्दारी ही अपनी पहचान है, चरित्र मेरी पूंजी है रचनाएँ मेरी थाती। लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी।। दिल की बात स्याही में समेटती मेरी कलम, शब्दों का श्रृंगार कर बनाती है दुल्हन, तमन्ना है लेखनी मेरी पाये जग में ख्याति । लेखनी को मैंने बनाया अपना साथी ।।