“माँ सरस्वती”

जय श्रीकृष्ण:

वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सभी को शुभ कामना .                                                                                         01-02-2017
“माँ सरस्वती”

माँ सरस्वती के जन्म दिवस पर उनके जन्म की बात करना चाहती हूँ .जो की पुराणों मे वर्णित है.आज की पीढ़ी का चित्त कभी कभी भटक जाता है इन कथाओं को सुनकर या पढ़कर .लेकिन उन देवताओं की महान शक्ति से हम  मानवों को जो मिला है वो ज्यादा महत्व का है.इसलिए उनकी आराधना करके अपने जीवन को सार्थक करना ही जीवन का ध्येय हो तो अच्छा है.
“सरस्वती पुराण” के अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा ने सीधे अपने वीर्य से सरस्वती को जन्म दिया था.इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरस्वती की कोई मां नहीं , केवल पिता ,ब्रह्मा थे. सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाता है.विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं कि स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण से खुद को बचाकर नहीं रख पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे.
सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारो दिशाओं में छिपने का प्रयत्न किया लेकिन उनका हर प्रयत्न बेकार साबित हुआ. इसलिए विवश होकर उन्हें अपने पिता के साथ विवाह करना पड़ा.
ब्रह्मा और सरस्वती करीब 100 वर्षों तक एक जंगल में पति-पत्नी की तरह रहे. इन दोनों का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया था स्वयंभु मनु.
इसके उलट “मत्स्य पुराण” के अनुसार ब्रह्मा के पांच सिर थे. कहा जाता है जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वह इस समस्त ब्रह्मांड में अकेले थे. ऐसे में उन्होंने अपने मुख से सरस्वती, सान्ध्य, ब्राह्मी को उत्पन्न किया.ब्रह्मा अपनी ही बनाई हुई रचना, सरवस्ती के प्रति आकर्षित होने लगे और लगातार उन पर अपनी दृष्टि डाले रखते थे. ब्रह्मा की दृष्टि से बचने के लिए सरस्वती चारो दिशाओं में छिपती रहीं लेकिन वह उनसे नहीं बच पाईं. इसलिय सरस्वती आकाश में जाकर छिप गईं लेकिन अपने पांचवें सिर से ब्रह्मा ने उन्हें आकाश में भी खोज निकाला और उनसे सृष्टि की रचना में सहयोग करने का निवेदन किया. सरस्वती से विवाह करने के पश्चात सर्वप्रथम मनु का जन्म हुआ.
ब्रह्मा और सरस्वती की यह संतान मनु को पृथ्वी पर जन्म लेने वाला पहला मानव कहा जाता है. इसके अलावा मनु को वेदों, सनातन धर्म और संस्कृत समेत समस्त भाषाओं का जनक भी कहा जाता है.
ये बातें करना मुझे शोभा नहीं देती क्योंकि मैं इतनी बड़ी नही हुई की सृष्टि के रचयिता परमपिता ब्रह्मा जी के बारे मे कुछ लिखू या माँ सरस्वती के बारे कुछ लिखू .ये एक पुराणों मे वर्णित कथा है इसलिए लिखी है .
आज की युवा पीढ़ी को ज्ञात हो इसलिए .लिखा है .माँ सरस्वती की कृपा से ही आज हमे वाणी मिली है .ज्ञान मिला है .पुराणों मे जो भी कथा लिखी होती है उसके पीछे कुछ न कुछ प्रयोजन होता है. विद्या से बड़ी कोई संपत्ति नही होती . सबसे बड़ा धनवान तो विद्यावान ही होता है .संसार की कोई भी संपत्ति मरने के बाद साथ नही जाती , लेकिन विद्या साथ ही रहती है ,अगले जन्म मे वही विद्या हमे आगे बढाती है.इसीलिए जन्म के बाद कोई कोई छोटी उम्र मे ही ज्ञानी की उपाधि से परिपूर्ण होता है. इसलिए अगर किसी मे धन इकठ्ठा करने की लालसा हो तो विद्याधन ज़रूर इकठ्ठा करें .जो शाश्वत है . माँ सरस्वती की कृपा वर्षा सबपर हो इसी शुभेच्छा के साथ
लेख को विराम देती हूँ .

परिचय - प्रतिभा देशमुख

श्रीमती प्रतिभा देशमुख W / O स्वर्गीय डॉ. पी. आर. देशमुख . (वैज्ञानिक सीरी पिलानी ,राजस्थान.) जन्म दिनांक : 12-07-1953 पेंशनर हूँ. दो बेटे दो बहुए तथा पोती है . अध्यात्म , ज्योतिष तथा वास्तु परामर्श का कार्य घर से ही करती हूँ . वडोदरा गुज. मे स्थायी निवास है .