काव्यमय कथा-8 : झूठी प्रशंसा से बचो

रोटी एक मिली कौए को,
मन में बहुत-बहुत हर्षाया,
उसे देखकर एक लोमड़ी,
का भी मन था ललचाया.

”कौए भाई, तुम हो अच्छे,
कितना मीठा गाते हो!
अपनी मीठी तान सुना दो,
क्यों इतना शर्माते हो!”

इतना सुनकर खुश हो कौआ,
लगा छेड़ने जैसे तान,
रोटी गिरी चोंच से नीचे,
कौआ भूला अपना गान.

रोटी लेकर चली लोमड़ी,
कौआ तब पछताया था,
मीठी बातों में आने का,
उसने जो फल पाया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।