पत्थरबाज कश्मीर नहीं दिल्ली में है

कितना अजीब लगता है की चोर बैठा है थाने में और हम उसे ढूढ़ रहे है गांव गली में ! ऐसा ही कुछ हम पत्थर बाजो के साथ कर रहे है. कुछ साल पहले हम ऐसा ही खालिस्तानियों के साथ भी कर रहे थे जिनके तार दुनिया के सारे देशो के साथ जुड़े हुए थे. जिसे इंदिरा जी ने अपने दृढ इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए एक ही झटके में समाप्त कर दिया. आज वैसे ही कार्यवाही की जरुरत है लेकिन हमारे प्र म का पैर वोट की लालसा और गाँधी बनने की ललक से बुरी तरह बंधा हुआ है. जबकि यह आईने की तरह साफ़ है की तमाम प्रयास करने के बावजूद प्र म जी उनका विश्वास कभी नहीं जीत सकते जिनके खून के हर बून्द में कट्टरता समाई हुई है.चाहे वह जातीय हो या धार्मिक ! जिस लोकतंत्र का पीठ हम ६५ साल से थपथपा रहे है वह आज पूरी तरह से देश के अखंडता पर नहीं खंड़ता पर टिका हुआ है, स्वच्छंदता पर टिका हुआ है. मोदी बस थोड़ा सा लगाम लगाने की कोशिश किये है जिसके फलस्वरूप jnu से लेकर कश्मीर तक देश को खंड खंड करने के नारे लग रहे है, पत्थर फेंके जा रहे है. जिस बंगाल में दुर्गा माँ के थोड़ा अपमान पर बंगाल जल उठता था वहा अब दुर्गा माँ को खुलेआम वेश्या कहा जा रहा है. फिर भी ममता जीत रही है किसके बुते पर अनुसंधान का विषय है. हिन्दू जनमानस अपने संस्कृति और परम्परा के प्रति कितना उदासीन हो चुका है चिंता का विषय है. जिस भारतीय सेना से पूरी दुनिया खौफ खाती है वह अपने देश में ही चूहा बन गया है. यहाँ का लोकतंत्र, यहाँ का संबिधान यहाँ के मतदाताओं का एक बर्ग सेना को इतना दयनीय बना दिया है. कट्टरपंथी तो कोढ़ है ही हिन्दुओ का एक तबका भी खाज का काम कर रहा है.

समझ में नहीं अत की सारी पंचायत हिन्दुस्तान में ही क्यों होती है ? कभी जाती के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर ! चीन अपने यहाँ बुरका पहनना तो दूर नमाज तक पढ़ने की इजाजत नहीं देता लेकिन वह कोई पंचायत नहीं होता. यहाँ बहाना बनाया जाता है की भारत एक लोकतांत्रिक और सेक्युलर देश है, समझ में नहीं आता की जिस प्राविधान से देश का इतना बड़ा नुक्सान हो रहा है, देश खंड खंड होने की स्थिति में पहुंच रहा है उसे कुछदिन के लिए छोड़ क्यों नहीं दिया जाता ! कुरआन के आयत की तरह उसे सीने से लगाकर हम कबतक देश को खंड खंड होने का इन्तजार करते रहेंगे. पिछले कई दिनों से टी वी पर पत्तरबाजो पर हो रहे डिबेट को देख रहा हु. पैनलिस्ट स्पष्ट रूप से दो भागो में बंटे दिखाई देते है पता नहीं अभी समझने और समझाने को क्या बचा है. कुछ पानलिस्टो द्वारा जिस प्रकार हिन्दुओ को अबे तब कहा जाता है, जिसप्रकार मोदी – योगी को अप्सब्द कहा जाता है उनके इरादे को स्पष्टतया जाहिर करता है.

कांग्रेस के एक नेता बड़े मासूमियत से कहते है की बच्चो पर गोली चलाओगे ? कश्मीर की क्या हालत बना दी है ? कश्मीर में पाकिस्तानी झंडा लहराता रहे, सारे पंडित भाग जाय वह हालत ठीक है लेकिन उसपर लगाम लगाने की कोशिश हो तो वह ठीक नहीं है. हमारे रंगरूट बच्चे पत्थर खाँय लेकिन उनके बद्तमीज बच्चे गोली न खाँय ! राजनेताओ के वजह से हमारी सेना नपुंशक लगने लगी है. कम से काम सियासत के पाशे पर सेना के इज्जत को दांव पर न लगाया जाय, गोली टॉप बंदूकों से झूझ रहे सेना को न्यायालय और संसद से निर्देश न दिया जाय. बेहतर तो होगा की एक पत्थर लगने पर सारे पत्थरबाज मार दिए जाय भले उनकी संख्या सैकड़ो में न होकर हजारो में हो. ए पत्थर बाज क्यों आते है, कहा से आते है, किसके इशारे पर आते है उसपर चिंतन करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

परिचय - राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय

रिटायर्ड उत्तर प्रदेश परिवहन निगम वाराणसी
शिक्षा इंटरमीडिएट यू पी बोर्ड
मोबाइल न. 9936759104