मेरी मानो तो सब ठीक हो जाये : माननीय प्रधानमंत्री जी को मेरा सुझाव

राष्ट्र को बलिदान की आवश्यकता है। मां भारती दिन पे दिन लजित हो रही है। प्रतिदिन इसके रखवालों को पत्थर मारे जा रहे हैं। हर रोज इसके सपूतों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। इसकी बर्बादी के सपने इसकी ही छाती पर बैठकर दुश्मन बुन रहे हैं और आप कहते हो सब ठीक है। हम दुश्मन को कड़ा जवाब देंगे। कुछ भी ठीक नहीं है मान्यवर। राष्ट्र पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और आप हमें सिर्फ दिलाशा दे रहे हैं। हमें म्यंमार जैसे हालातों तक नहीं पहुंचना वैसे भी हम पहले ही बहुत युद्ध झेले हुए हैं। पहले ही मां भारती के कई टुकड़े करवा चुके हैं और हर उस टुकड़े पर केवल इस्लाम का ही हक हुआ है। अब हमने इतिहास से सीख लिखा है। यदि शांत रहेंगे तो ऐसे ही टुकड़ों में बटते रहेंगे और अपनी ही भूमि पर परवासी बन कर रहेंगे। हम दिन पे दिन सिमटते जा रहे हैं और दुश्मन बढ़ते जा रहे हैं। बस अब बहुत हो चुका।

अब एक आदेश करो सभी सरकारी कर्मचारियों का मासिक वेतन आधा करो। क्योंकि 4-5 हजार वाला व्यक्ति भी अपने बच्चों को पालता है, फिर सरकारी कर्मचारियों को लाखों देने की क्या जरूरत है? जब देश ही नहीं रहेगा तो सरकार और उसके नौकर क्या खाक करेंगे। उस धन से देश की सेना मैं भर्ती शुरू करो। युवाओं को स्वयं की एवं मां भारती की रक्षा करने के अवसर दो। बहुत बड़ी संख्या है हमारे पास बेरोजगार युवाओं की। जब प्रत्येक युवा सेना में होगा तो, प्रत्येक युवा के हाथ में हथियार होगा और वो हमेशा मां भारती की रक्षा के लिए तत्पर रहेगा तथा देश में पल रहे शत्रुओं के सिर कुचलेगा। अब और शत्रुओं को उत्पात मचाने के अवसर मत दो। अब और शत्रुओं को देश के टुकड़े करने के अवसर मत दो। अब और शत्रुओं को तिरंगा फाड़ने, राष्ट्रगान का अपमान करने, पाकिस्तान के नारे लगाने, आतंकवादी के मरने पर चिल्लाने, सेना पर पत्थर मारने के अवसर मत दो। अब और कश्मीर मत बनने दो। अब और बंगाल मत बनने दो। रोको मां भारती की छाती पर पल रहे इन शत्रुओं को रोको। नहीं तो ये शीघ्र ही यहां भी म्यंमार बनाने वाले हैं। अब तक तो गाय खाते थे। फिर हिन्दू को खाने वाले हैं।

डी. एस. पाल

परिचय - डी. एस. पाल

फिल्म राइटर्स एसोसिएशन मुंबई के नियमित सदस्य, हिन्दी उपन्यास "आतंक के विरुद्ध युद्ध" के लेखक, Touching Star Films दिल्ली में लेखक और गीतकार के रूप में कार्यरत,