व्यंग्य – गांधी जी का चौथा बंदर

माने तो जाते है गांधी जी के तीन बंदर लेकिन आजकल चौथे बंदर का फोग चल रहा है। या यूं कहे तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस चौथे बंदर के आगे तीनों बंदरों का वर्चस्व डाउन हो गया है। यह चौथा बंदर कमाल और धमाल है। इसकी आदतें और हरकतें बाकि के तीन बंदरों से बिलकुल ही भिन्न है। यह तो बुरा कई हो रहा हो तो आंखे बंद करने की बजाय आंखे फाड़-फाड़ देखता है। भले ही कितना भी जरूरी काम क्यों न हो, रूककर मुफ्त का सिनेमा देखना इसकी फितरत में शुमार है।

यह बुरा देखकर अपना मनोरंजन करता है। अपार आनंद उठाता है। और यह बुरा सुनते ही अपने कान बंद करने की बजाय ओर भी खोल देता है। बुरा सुनने की इसको बड़ी तलब लगी रहती है। बुरे शब्द तो इसके लिए इससे अच्छा कोई शब्द ही नहीं। बुरा सुनने से इसी कोई फर्क नहीं पडता। साथ ही में यह बुरा नही बोलने की जगह “बुरा ही बोलो” की परंपरा का कटु पक्षधर है। बिलकुल, कटु उसी तरह जिस तरह लोग जाति और धर्म में कट्टरता दिखाते है। यह बुरे से बुरा बोलता है। बुरा बोलकर इसको बड़ा अच्छा लगता है।

वाकई ! ये चौथा बंदर है ना जरा हटके। लेकिन, आज तो इसका ही युग चल रहा है। ये कभी श्वेत खादी को लपेटकर नेता बनने का ढोंग रचता है, तो कभी श्वेत पोशाक पहनकर किसी की भी मय्यत में घुस कर घडियाली आंसू बहा देता है। ये चौथा बंदर गिरगिट का भी बाप है। घड़ी-घड़ी रंग बदलता है। यहां तक की घड़ी भी इससे परेशान हो गई है। इस चौथे बंदर की भरमार है। जिधर देखो उधर यह तैयार ही मिलता है। कभी यह सरकारी बस में बिना टिकट के यात्रा कर लेता है, तो कभी रेलवे स्टेशन को अपना पुश्तैनी घर समझ बैठता है। यह सरकारी कार्यालयों में खास तौर पर घुस विभाग में तैनात किया जाता है। एक ओर से यह घुस का पर्याय ही है। जैसे घुस ही इसकी आय है।

जब भी गांधी जयंती आती है तो यह अपने फुल फॉर्म में आ जाता है। जगह-जगह जाकर गांधी जी की प्रसन्नता के पुल बांधता है। गांधी जी की तारीफ में सारी सीमाएं लांघ जाता है। मीडिया के सामने खुद को गांधी भक्त बताता है। गांधी टोपी पहनता है और मौका देखकर पहनाता और घुमाता भी है। शराब और शबाब से वनवास लेने का दावा भी करता है। इससे बड़ा ईमानदार और सरीफ जैसे दुनिया में आजतक कोई पैदा ही नहीं हुआ। लेकिन, जैसे ही शाम ढलने लगती है इसका गांधीवादी नशा उतरने लगता है। यह गे-टप बदलता है। हाथों में इसके महंगी अंग्रेजी बोतल और बाजू में देशी फुलझड़ी आ जाती है। यह चौथा बंदर सुबह से लेकर शाम तक दुनिया की नजरों में बाबा होता है, तो शाम के आगोश में बाबियों का ब्रांड एम्बेसडर बन जाता है। फिर सारी रात कल्याण ही कल्याण होता है। अभी तो इस वर्चुअल दुनिया में यह 4जी बंदर ही लांच हुआ है। आगे-आगे देखिये होता है क्या।

परिचय - देवेन्द्रराज सुथार

देवेन्द्रराज सुथार , अध्ययन -कला संकाय में द्वितीय वर्ष, रचनाएं - विभिन्न हिन्दी पत्र-पि़त्रकाओं में प्रकाशित। पता - गांधी चौक, आतमणावास, बागरा, जिला-जालोर, राजस्थान। पिन कोड - 343025 मोबाईल नंबर - 8101777196 ईमेल - devendrasuthar196@gmail.com