कहानी

कहानी-आजाद पंक्षी

 

ज़िन्दगी इतनी आसान नही होती जितना कि लोगों को और समाज को लगता है कि एक महिला को कितने भागों में विभाजित कर दिया जाता है ,पहले एक बेटी का दर्जा फिर पत्नी फिर बहु,फिर मां,भाभी और न जाने कितने रिश्तो को संभालती है एक औरत,मगर जरा सी गलती हो जाने पर कोई उसका साथ नही देता । चाहे समाज हो या अपना परिवार या फिर अपना जीवनसाथी कोई नही समझता उसकी भावनाओ को। मां बाप का सिर कभी नीचा नही होने देती है एक बेटी,भले ही अपने प्यार का बलिदान क्यूँ न करना पड़ जाये, अपने माँ बाप की इज्जत के लिए खुद के सपने तक ताक पर रखने वाली सिर्फ बेटियां ही होती है । किसी से कोई उम्मीद किये बिना हर फर्ज को निभाती है, अपने माँ बाप का घर त्याग कर ससुराल में बहु बनकर सभी कर्तव्य निभाती है एक अच्छी बहु बनने की हर कोशिश करती है और पति की परवाह भी मगर जरा सी चूक होने पर उसी पत्नी पर हाथ उठाने और उनको प्रताड़ित करना कहाँ का इंसाफ है। एक औरत सिर्फ इन सबके बदले में खुद के लिए प्यार और सम्मान ही तो माँगती है। अपने बच्चे को जन्म देकर उसकी देखभाल में खुद को भी भूल जाती है और अंत मे वही बच्चे तक उसको छोड़ कर चले जाते है अपने सपने पूरे करने के लिये । मां होने का फर्ज तो निभाती है मगर बच्चो को अपने कर्तव्य क्यूं याद नही रहते। एक औरत सिर्फ सम्मान की भूखी होती है मगर क्या उसके हक में ये सब है क्या उसकी इच्छाएं और उसकी आजादी पर कोई अंकुश तो नही है? हमारी आज की कहानी पूर्वी की है जिसने कितना कुछ किया अपने प्यार और अपने घर वालो के लिये मगर कही क्या उसके परिवार या उसके प्यार ने उसकी इच्छाओं की कद्र की या फिर उसको लड़की है या फिर पत्नी हो या फिर मां हो?? जैसे प्रश्नचिन्ह से घेर दिया गया।एक औरत अपने हर रिश्ते में खुद को समर्पित कर देती है और बदले में उसको सिर्फ तिरस्कार ही क्यूं मिलता है यही सोच रही थी पूर्वी । पूर्वी की मां पूर्वी के कमरे में आई और पूछने लगी क्या है ये सब कब से चल रहा है तुमको अपने माँ बाप की इज्जत का ख्याल नही आया मेरी बात कान खोल कर सुन लो मैंने राकेश जी का बेटा पसन्द कर लिया है तुम्हारे लिये और कल तुम्हारी सगाई है इतना ध्यान रखना मैं कतई बर्दाश्त नही करुँगी। कितना कुछ किया है हमने तेरी खुशी के लिये और अगर तुमने इनकार किया तो कल इस घर से 2 लाशें निकलेगी फिर कर लेना मनमानी। और कमरे से चली गयी बिना कुछ जबाब सुने। आंखों में आंसू और मन मे कई सवाल कि जो मां अपने बच्चो की खुशी के लिये कुछ भी कर सकती है और एक औरत होके भी मेरी भावनाओ की कद्र किये बिना कोई भी फैसला ले लिया मगर माँ की ज़िद्दी आदत और मजबूरी ने पूर्वी को अपने प्यार से मुंह मोड़ना पड़ा। रवि ने रात भर कॉल की पूर्वी को मगर मजबूरियों के बंधन में खुद को बांध चुकी थी पूर्वी। घर मे कुछ मेहमान ही बुलाएंगे एक अजनबी इंसान से सगाई हो गयी थी पूर्वी की। अपने कमरे में चीख चीख कर रोना चाहती थी मगर कोई जान न जाये तो चुप चाप लेट गयी। रवि की कॉल आ गयी । कॉल तो रिसीव कर ली पूर्वी ने मगर कुछ बोलने की हिम्मत नही कर पाई थी बस यही शब्द निकले मुँह से’ मुझे भूल जाओ’ यही बोलकर फफक फफक कर रोने लगी। आखिर उसने यही गुनाह किया था कि एक मध्यमबर्गीय युवक से प्यार किया था उसको यकीन था कि रवि के पास  पैसे की कमी हो भले ही हो मगर दुनिया भर की खुशियां खरीद कर दे सकता है उसको। मगर आज उसके कर्तव्यो ने उसके प्यार का बलिदान दे दिया। रवि ने भी बस यही बोल दिया कि ज़िन्दगी भर तुम मेरे जैसे इंसान के लिये तरसोगी मगर मुझसा प्यार करने वाला कभी नही मिलेगा। पूर्वी जानती थी कि रवि ने जो बोला वो सही था मगर फर्ज के आगे मजबूर थी वो। शादी की तैयारी जोरोशोरो से चल रही थी। शादी भी सम्पन्न हो गयी । अपने ससुराल आ चुकी थी पूर्वी ,रात के अंधेरे में कोई शख्श उसको बिना मर्जी के छूने की कोशिश कर रहा था उस अनजान शख्श ने ये भी नही सोचा कि क्या अभी पूर्वी की मर्जी है भी या नही । इंसान कम एक जानवर ही लगा वो क्योंकि हवस और वहशीपन की सारी हद तोड़ कर उसने पूर्वी को भी तोड़ दिया चुपचाप सहती रही वो। हर रात यही खेल चलता रहा पूर्वी को एक हमसफ़र नही मिला था बल्कि एक भेड़िया मिला था उसने पूर्वी की परवाह कभी नही की । पूर्वी कभी कुछ नही कहती सब सहती जा रही थी क्योंकि उसको एक कर्ज चुकाना था वो था बेटी होने का,बहु होने का पत्नी होने का,उसकी मां ने कभी नही जानना चाहा कि उसकी बेटी कैसी है । सास ससुर तो जानते ही थे कि उनका बेटा अय्याश है अब पत्नी को उसको कैसे काबू में करना है आखिर औरत हो उसको अपनी तरफ आकर्षित करो फिर देखो कैसे गुलाम बन जायेगा। मगर पूर्वी को एक प्यार करने वाला पति चाहिए था जो उसकी परवाह करे,मगर यहां तो सब उसको दोष दे रहे हैं । ऐसी शादी और ऐसे लोगो के बीच रहकर पूर्वी का दम घुट रहा था । पैसे और रुतबे का क्या करेगी जब उसके पास उस्का खुद का आत्मसम्मान ही नही है। एक रात बहुत सोचने के बाद पूर्वी ने फैसला लिया कि वो सब कुछ बदलकर रहेगी उसको अपने पति को सही रास्ते पर लाना ही होगा। सास ससुर ने तो साथ छोड़ ही दिया अब रोहित को सुधारने की जिम्मेदारी ले ही ली उसने। आखिर कब तक यही सब सहती रहेगी। क्या फायदा उस पढ़ायी का । पूर्वी ने एम.बीए. किया था। ससुर के बिजनेस में अब वो आगे आएगी। उसने अपना हिस्सा माँगा अपने ससुर से । तिलमिला कर रह गए रामानंद मगर एक पत्नी जब अपनी पर आ जाये तो अच्छे अच्छे सही रास्ते पर आ जाते हैं यही हुआ बिजनेस की कमाई पर आधा हक पूर्वी का हो गया था रोहित को बहुत गुस्सा आता मगर आने बाप के आगे और पूर्वी की धमकियां उसको डरा देती । धीरे –  धीरे सब ठीक होने लगा। पूर्वी प्रेग्नेंट थी पूरे घरवाले खुश थे आखिर उनके घर का वारिश जो आने वाला था । होटल में शानदार पार्टी हुई । 9 महीने तो जैसे काटे नही कट रहे थे भले ही जो हुआ जबरदस्ती हुआ मगर आखिर ये रोहित का खून था और पूर्वी को मातृत्व का एहसास दिलाया था इस नन्हे से मेहमान ने । 9 महीने बाद पूर्वी ने एक बेटी को जन्म दिया । सास तो नाराज होकर देखने तक नही आई ससुर ने  सिर्फ एक एहसान सा जताते हुए हॉस्पिटल के बिल तो जमा कर दिए मगर उस नन्ही सी जान को नज़र भर के किसी ने नही देखा सिवाय पूर्वी के। एक मां थी वो जो उसकी मां ने उसके साथ किया वो अब अपनी बेटी के साथ नही होने देगी। हॉस्पिटल में एक चिट्ठी लिख कर पूर्वी ने अपनी बेटी को लेकर कही दूर निकल गयी। रोहित और उसके परिवार से कही दूर जहां वो और उसकी बेटी चैन की सांस ले पाए। खुद तो इतनी काबिल थी ही । बेटी को पालपोसकर बड़ा किया । और एक दिन एक कंपनी की फाइल देख रहा था रोहित । इंडिया की  सीमेंट की बेस्ट कंपनी थी नाम था’ पूर्वी रोहित परिधि ‘ जब फाइल की डिटेल्स चेक की तो उसकी पत्नी और बेटी ही थी मगर आज पछतावे की सिवाय कुछ नही था रोहित के पास। आज पूर्वी ने अपनी बेटी को पूरा खुला आसमान दे दिया था जहां सिर्फ आजादी और खुली हवा थी। जो तकलीफे उसने सही वो अपनी बेटी को सहने नही देगी। एक बेस्ट मां थी वो। परिधि ने एक कहानी लिखी थी और उसको ही पढ़कर रवि की आंखे नम थीं और अब उसके मन कि कड़वाहट भी कम हो गई थी।

‘उपासना पाण्डेय’आकांक्षा

हरदोई(उत्तर प्रदेश)

उपासना पाण्डेय

पूर्ण नाम : आकांक्षा पाण्डेय साहित्यिक नाम ; उपासना पाण्डेय जन्मतिथि : 21दिसम्बर 1991 वर्तमान पता: ट्रांजिस्ट हॉस्टल के पीछे आजाद नगर हरदोई शहर : हरदोई जिला: हरदोई राज्य : उत्तर प्रदेश विधा: पद्य (श्रृंगार रस ,रचनाये) गद्य( लघुकथाएं, सामाजिक लेख, कहानियां) ब्लॉग-Upasnamerasafr.blogspot.in