साहस के पुतले

इस धरती की कठिन डगर पर, आगे बढ़ते जाएंगे
साहस के पुतले बनकर हम, जग को स्वर्ग बनाएंगे-

आज हमारी आजादी पर, पांव पड़े गद्दारों के
आज हमारी सीमा पर हैं, डेरे खूनी सायों के
नई पौध के नन्हे अंकुर, बन महान दिखलाएंगे
साहस के पुतले बनकर हम, जग को स्वर्ग बनाएंगे-

हममें से कोई राणा होगा, कोई वीर शिवा होगा
कोई होगा गांधी-गौतम, कोई कृष्ण दिवा होगा
नन्हे-नन्हे नौनिहाल हम, जग-दर्पण महकाएंगे
साहस के पुतले बनकर हम, जग को स्वर्ग बनाएंगे-

नई-नई खोजें करके हम, नया चमन महकाएंगे
कोई दुःखी रहे न यहां पर, ऐसा जगत बना सकते
छोटे हैं हम फिर भी जग में, काम बड़े कर जाएंगे
साहस के पुतले बनकर हम, जग को स्वर्ग बनाएंगे-

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।