पानी रे पानी!

                                                                    अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस पर विशेष
आज अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस है. यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं है, कि जल ही जीवन है, इसलिए 22 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय जल दिवस मनाया जाता है. पानी हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है. इसलिए पानी को अमृत भी कहते हैं. विश्वभर में पानी की कमी के कारण पानी के लिए तीसरे विश्व युद्ध की भी आशंका जताई जा रही है. आप खाने के बिना एक महीने तक जिंदा रह सकते हैं, लेकिन पानी के बिना एक हफ्ते से ज्यादा नहीं जी सकते. पानी हाइड्रोजन और ऑक्सीजन, दो एलीमेंट्स से मिलकर बना होता है और यह सॉलिड, लिक्विड और गैस तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है. शुद्ध पानी में कोई महक या टेस्ट नहीं होता और इसका पीएच लगभग 7 होता है. पानी की ज्यादा मात्रा जल्दी-जल्दी पीने से आपको नशा हो सकता है. इसकी वजह यह है कि पानी से ब्लड का सोडियम लेवल डाल्यूट हो जाता है, ऐसे में ज्यादा पानी दिमाग का बैलेंस गड़बड़ा सकता है. इससे काफी हद तक वैसे लक्षण दिखाई देते हैं जैसे ऐल्कॉहॉल से. आपको जानकर हैरानी होगी-
1.आप जो एक कप कॉफी पीते हैं, उसके लिए कॉफी बीन उगाने में करीब 200 लीटर पानी इस्तेमाल हो जाता है.
2.हम जो भी खाते हैं उसमें पानी की कुछ न कुछ मात्रा जरूर होती है लेकिन इनमें मौजूद दूसरी चीजों के चलते इसका पॉजिटिव इफेक्ट खत्म हो जाता है. इसलिए स्वस्थ्य रहने के लिए हमें कम से कम आठ ग्लास स्वच्छ पानी पीना चाहिए. वैसे पानी की यह मात्रा फिक्स नहीं, हर शरीर की जरूरत अलग-अलग होती है.
3.टॉइलट फ्लश करने में करीब 8 लीटर पानी का इस्तेमाल होता है.
4.नासा ने चांद पर बर्फ के रूप में पानी की खोज की है.
5.कुछ विशेष परिस्थितियों में गर्म पानी ठंडे पानी से जल्दी जमता है.
6.सुरक्षित पेयजल से दुनिया की करीब 2.1 अरब आबादी महरूम है. दुनियाभर में हर साल 3.4 लाख बच्चों (5 साल से कम उम्र के) की मौत डायरिया से हो जाती है. दुनिया में हर 10 में से 4 लोग पानी की कमी से प्रभावित हैं.
7.भारत में प्रति व्यक्ति के हिसाब से सालाना पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट हो रही है। 2001 में यह 1,820 क्यूबिक मीटर था, जो 2011 में 1,545 क्यूबिक मीटर रह गया. 2025 में इसके घटकर 1,341 क्यूबिक मीटर और 2050 तक 1,140 क्यूबिक मीटर बचने की आशंका जताई गई है.
8.एक छोटा सा देश है पापुआ न्यू गिनी। यहां हर दिन 50 लीटर पानी के लिए प्रति व्यक्ति आय का 54 फीसदी हिस्सा खर्च करना पड़ता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश की 60 फीसदी आबादी की पहुंच में पीने का साफ पानी नहीं है.
9.पानी की कमी के कारण अपने देश में खरीफ की फसलों की बुआई में कमी आई है.
10.पेड़-पौधों से जल चक्र बेहतर रहता है और आपदा से बचाव होता है. एक तरफ एक यूकेलिप्टस का वृक्ष प्रतिदिन 24 गैलन पानी अवशोषित करता है तो वहीं बांज और बुरांस अपनी जड़ों में पानी को संरक्षण करनेवाले पौधे माने जाते हैं, जो हिमालयी क्षेत्र में पाए जाते हैं. इसके अलावा भी कई पौधे हैं जो पानी का संरक्षण करते हैं.
11.प्रदूषित पानी पीने और साफ-सफाई के अभाव में दुनिया के गरीब देशों में बीमारी और बदहाली तेजी से बढ़ रही है। दुनिया में 2.3 अरब लोगों के पास शौचालय जैसे स्वच्छता के प्राथमिक संसाधन नहीं हैं.

हम बचपन से सुनते आए हैं कि पानी ही जिंदगानी है पर जरा सोचिए, अगर किसी दिन आपको पानी न मिले तो क्या होगा? हो सकता है कि हमें वह दिन देखना न पड़े पर जिस तेजी से पानी की बर्बादी हो रही है, हम नहीं तो हमारी आनेवाली पीढ़ी को जरूर पानी के बड़े संकट से गुजरना होगा. ऐसे में पानी के दोबारा इस्तेमाल से, रोजमर्रा के कामों में पानी का उपयोग कम करके हम जल संरक्षण में अपना योगदान कर सकते हैं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।