दो क्षणिकाएं: हमदर्दी और गवाह

                 हमदर्दी 
दुर्घटना में पप्पू की टांग में फ्रैक्चर हो गया,
पप्पू को डॉक्टर के पास जाना था, सो गया,
डॉक्टर ने कहा- ”बाएं पैर में फ्रैक्चर है, प्लास्टर चढ़ेगा.”
यह सुनकर पप्पू बहुत खुश हो गया. 
वह डॉक्टर से बोला- ”डॉक्टर साहब, एक कृपा करिएगा,
जरा दाएं पैर में भी प्लास्टर चढ़ा दीजिएगा, 
डॉक्टर ने कारण पूछा, पप्पूने फरमाया-
”रिजल्ट आने वाला है, दूसरा पैर बाबूजी तोड़ देंगे,
आप हमदर्दी का मरहम लगाकर मुझे बचा लीजिएगा.

 

                      गवाह
प्रेमी और मुसीबतों का चोली-दामन का साथ है,
पता ही नहीं लगता, इसमें किसका कितना हाथ है!
प्रेमी की मोहब्बत के बस दो ही गवाह थे, 
एक वह और दूसरी उसकी दादी. 
प्रेमी की मुसीबत की तो तब हद ही हो गई,
अब गवाह को कहां से लाया जाए,
एक मुकर गई और दूसरी गुजर गई!

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।