ज़हरीले साँपों से बचना मुश्किल है

ज़हरीले साँपों से बचना मुश्किल है
छल करने वालों से बचना मुश्किल है ।

ना कहने वालों का साफ जवाब भला
हाँ कहने वालों से बचना मुश्किल है ।

उसकी बातों से बस फूल झरा करते
पर झूठे वादों से बचना मुश्किल है ।

दुश्मन के हमले से फिर भी बच सकते
खुद के आघातों से बचना मुश्किल है ।

चोर लुटेरे डाकू शायद रहम करें
पर चौकीदारेा से बचना मुश्किल है ।

लोहे की जंजीरें तोड़ी जा सकतीं
सोंने के फंदों से बचना मुश्किल है ।

ग़ैरों से तो आप सतर्क जरूर रहें
ध्यान रहे अपनों से बचना मुश्किल है ।

परिचय - डॉ डी. एम. मिश्र

उ0प्र0 के सुलतानपुर जनपद के एक छोटे से गाँव मरखापुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्म । शिक्षा -पीएच डी ,ज्‍योतिषरत्‍न। गाजियाबाद के एक पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में कुछ समय तक अघ्यापन । पुनश्च बैंक में सेवा और वरिष्ठ -प्रबंघक के पद से कार्यमुक्त । विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में 400 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित और कई बार आकाशवाणी व दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण । ‘इज्जतपुरम्’ , ‘उजाले का सफर’ , ‘ रोशनी का कारवॉ ’ , ‘यह भी एक रास्ता है’ सहित आठ काव्य- कृतियाँ प्रकाशित । ‘‘ आईना - दर - आईना ’’ , गजल संग्रह शीघ्र प्रकाश्य ।कई साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं से पुरस्कृत । अवधी अकादमी का ‘ ‘जायसी पंचशती सम्मान’ , भारत - भारती का ‘ लोकरत्न सम्मान’ , राष्ट्रीय साहित्य पीठ इलाहाबाद द्वारा ‘ भारती -भूषण सम्मान ’ , प्रेमा देवी त्रिभुवन अग्रहरि मेमोरियल ट्रस्ट अमेठी द्वारा प्रशस्ति पत्र , , दीपशिखा सम्मान , रश्मिरथी सम्मान आादि ! सम्पर्क:604, सिविल लाइन, निकट राणा प्रताप पी0जी0 कालेज सुलतानपुर-228001 मो0 9415074318