यह छुईमुई नहीं कैक्टस है

लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस में एक महिला अपने पति के साथ पासपोर्ट बनवाने गई। महिला ने अपना नाम तन्वी सेठ आवेदन पत्र में भरा। महिला के पति ने अपना नाम मोहम्मद अनस सिद्दीकी भरा। पासपोर्ट अफसर ने महिला के हिन्दू और पति के मुस्लिम होने पर उनका विवाह प्रमाणपत्र माँगा। महिला ने निकाहनामा और धर्मपरिवर्तन के कागज़ दिखाए। जिसमें महिला का नाम सादिया था। एक ही व्यक्ति के दो अलग अलग नाम हो तो उसके वर्तमान नाम से ही पासपोर्ट बनेगा। यह सर्वमान्य नियम है। पासपोर्ट विभाग के वरिष्ठ अधीक्षक विकास मिश्र ने भी सरकारी नियम का पालन करते हुए पुराने के स्थान पर नए नाम से पासपोर्ट बनवाने की सलाह दी और पासपोर्ट आवेदन को स्वीकारिता नहीं थी। फिर क्या था? वही हुआ जो एक छुईमुई के पौधे को छूते ही होता हैं। एका-एक प्रतिक्रिया। अपनी गलती को स्वीकार करने के स्थान पर इस महिला तन्वी सेठ ने ट्विटर पर भाजपा की नेता और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से उक्त अधिकारी की शिकायत कर दी कि उसने महिला के हिन्दू और पति के मुस्लिम होने पर एतराज किया हैं। इस शिकायत में महिला ने विदेश मंत्री से सख्त कार्यवाही करने की सिफारिश की। हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कोंग्रेसियों और सभी सेक्युलरों को पीछे छोड़ते हुए तत्काल उक्त अधिकारी को नियुक्ति से निरस्त किया। फिर अगले दिन इस दंपत्ति को बुलाकर उनके हाथ में पासपोर्ट एक घंटे के भीतर बना कर पकड़ा दिया। वाह सुषमा जी वाह। आप विदेश मंत्री है। दशकों से राजनीती में है। कोई भी शिकायत होती है। तो उसमें सबसे पहले कुछ सदस्यों की एक जाँच कमेटी बनती है। दोनों पक्षों की गवाही के पश्चात वह मंडल अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपते हैं। उस रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही होती है। आपने बिना किसी जाँच समिति को बनाये, बिना गवाही लिए, बिना रिपोर्ट दाखिल किये। तत्काल एक तरफ़ा कार्यवाही करते हुए। एक सरकारी नियम से कार्य कर रहे कर्मचारी को सबसे पहले निरस्त कर भारी गलती की। फिर जमाई राजा के समान उक्त दंपत्ति को पासपोर्ट दफ्तर बुलाकर उन्हें चाय, ठंडा पिलाकर सभी नियमों को ताक पर रखकर उनका पासपोर्ट उन्हें भेंट किया। यह सब किसके लिया किया? इस दम्पति को खुश करने के लिए या मुसलमानों को खुश करने के लिए। मुस्लिम समाज सदा अपने आपको पीड़ित दिखाने की कोशिश करता है। अल्पसंख्यक दिखाने की उसकी यह मानसिकता, सदा शोषित दिखाने की उसकी यह मानसिकता। उसकी सोच पर हावी है। इसे छुईमुई नहीं बल्कि कैक्टस मानसिकता कहते हैं। जिसे छेड़ने वाले के हाथ छीलते ही छीलते है। 1947 में भी यही मानसिकता दिखाकर भारत के दो टुकड़े करवा दिए। खेद है कि 1200 वर्षों के अनगिनत अत्याचार करने के बाद भी मुस्लिम समाज अपने आपको पीड़ित दर्शाता है। हिन्दू समाज के नेता उसे सदा बड़े दिल वाला बनने की सलाह देते रहते हैं। उसे सिखाया जाता है कि सुलह करो। समझौता करो। इस सुलह के चक्कर में पाकिस्तान, बांग्लादेश छूट गए। इस सुलह के चक्कर में कश्मीर, बंगाल, असम, केरल के छूटने की तैयारी हैं। पर अभी भी यही सेक्युलर पाठ पढ़ाया जा रहा है। मैं भाजपा के सभी नेताओं, आदरणीय प्रधानमंत्री जी और विदेशी मंत्री साहिबा से यही कहना चाहूंगा कि वोट तो आपको हिन्दू समाज ने ही दिए है। वही आगे भी देगा। इसलिए उसकी सुनों। चार साल हो गए। राम मंदिर, गौरक्षा, धारा 370, धर्मान्तरण निषेध विधेयक, लव जिहाद जैसे विशुद्ध हिन्दुओं के मुद्दों पर हमें कोई ठोस कदम नहीं दिखा हैं।

2019 आने वाला है। कहीं हिन्दुओं का मोहभंग न हो जाये।

और ट्विटर वालों को छुईमुई नहीं कैक्टस समझो।

— डॉ विवेक आर्य