२०१९ का मास्टर स्ट्रोक

बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति।

बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति ।।.…की तर्ज पर भाजपा समर्थित कश्मीर में पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया, इन्होने तीन दिन के बजाय तीन साल का समय लिया. कोई बात नहीं. जब जागे तभी सवेरा, अगर कुछ सकारात्मक होता है तो! क्योंकि अब और कोई उपाय नहीं रह गया है भाजपा के पास सिवाय यह कि दूसरों पर ठीकरा फोड़ सके. अभीतक उनका निशाना कांग्रेस और सत्तर साल रहा है आज भी है. पधान मंत्री मोदी भी हर मौके पर कांग्रेस और एक खास परिवार को कोसने से कभी बाज नहीं आते चाहे कोई भी मौका क्यों न हो. मध्य प्रदेश के राजगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मुझे आज चार हज़ार करोड़ रुपये की मोहनपुरा सिंचाई परियोजना के लोकार्पण के साथ-साथ पानी की तीन बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने का अवसर मिला है. उन्‍होंने कांग्रेस का नाम लिए बगैर कहा कि यह इस देश का दुर्भाग्‍य है कि एक परिवार को महिमा मंडन करने के चक्‍कर में अनेक सपूतों के बलिदान और योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया.

वहीं जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर बीजेपी ने जम्मू में बड़ी रैली की जिसे अमित शाह ने संबोधित किया. अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस बताए कि उनकी पार्टी और लश्कर में क्या संबंध है क्योंकि कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का बयान आते ही लश्कर ने उसका समर्थन कर दिया. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के बयान को लश्कर-ए-तैयबा समर्थन देता है, क्या राहुल गांधी  जी बताएंगे कि कांग्रेस और लश्कर की ये फ्रिक्वेंसी मैच कैसे कर रही है. अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी में अगर गैरत है तो वो अपने नेताओं से सवाल पूछें. अपने दो नेताओं के बयान पर राहुल गांधी माफी मांगे, लेकिन मुझे यकीन है कि वो माफी नहीं मानेंगे. कांग्रेस जितना भी षड्यंत्र कर ले कश्मीर भारत से कभी अलग नहीं होगा,ये हमारा प्रण है. बीजेपी ने समर्थन वापस लिया और सरकार गिर गई. ये दिखाता है कि हमें सत्ता नहीं जम्मू-कश्मीर के विकास की चिंता है. कश्मीर में हालत ऐसे हुए कि शांति बहाल नहीं हो पाई और जवान औरंगजेब और पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या की गई, विकास का संतुलन महबूबा सरकार में बिगड़ गया और जम्मू-लद्दाख से पीडीपी सरकार ने भेदभाव किया.

जम्मू – कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने हाल में कहा था कि सुरक्षा बल घाटी में आतंकवादियों से ज्यादा नागरिकों को मार रहे हैं. वहीं सोज ने अपनी आगामी किताब में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ के विचारों का कथित तौर पर समर्थन किया है कि अगर कश्मीरियों को मौका दिया जाए तो वे स्वतंत्रता का विकल्प चुनेंगे.
अमित शाह ने कहा कि 70 सालों में जो नहीं हुआ वो मोदी सरकार के राज में जम्मू और लद्दाख के लिए किया गया. हालांकि जम्मू के एम्स का काम पीडीपी सरकार ने अटका दिया. अगर हम जम्मू और लद्दाख के विकास का काम क्यों नहीं हुआ इसका जवाब पीडीपी से मांगते हैं तो क्या ये गलत है, राज्य के विकास के बारे में महबूबा सरकार से सवाल मांगते हैं तो क्या ये गलत है? एनसी-पीडीपी सरकारों ने शासन किया लेकिन जम्मू-कश्मीर का विकास नहीं किया. जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए मोदी सरकार ने फंड दिया लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया गया. जम्मू को स्मार्ट सिटी घोषित किया लेकिन इसका डीपीआर आज तक नहीं बना. बीजेपी चाहती थी कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का समान विकास हो लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. आतंक के खिलाफ हमारी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है. हम चाहते हैं कि जिस तरह दिल्ली, बंगाल ,बेंगलुरू, गुजरात का युवा अपने भविष्य के सपने देखता है और उसे साकार करता था जम्मू-कश्मीर का युवा भी ऐसा कर सके. राज्य में अब राज्यपाल शासन लगा है, पाक शरणार्थियों के लिए दिए गए 15 हजार करोड़ खर्च नहीं हुए. हम जल्द से जल्द पाक शरणार्थियों तक मुआवजे की रकम पहुंचाएंगे-

बीजेपी के पीडीपी नीत गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद शाह का यह जम्मू कश्मीर का पहला दौरा था. राज्य में फिलहाल राज्यपाल शासन लागू है. इस दौरे को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह है, लेकिन साथ ही इस दौरे की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि अमित शाह का यह दौरा बीजेपी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि वाले दिन हुआ. डॉ श्यामा प्रसाद ने जम्मू कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय के लिए श्रीनगर की एक जेल में प्राणों की आहूति दी थी. अब उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर अमित शाह का जम्मू आने का मतलब साफ़ है कि अब बीजेपी अपने कोर मुद्दों पर वापस लौटेगी. बीजेपी यह मान रही है कि अमित शाह का यह दौरा ना केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकेगा बल्कि इसी दौरे के साथ राज्य में लोकसभा और राज्य के चुनावी की तैयारी शुरू हो जाएगी. यह रैली इसलिए भी ख़ास कही जायेगी क्योंकि इस बार उसी दिन हुए प्रधानमंत्री के भाषण को काफी सारे चैनलों ने लाइव नहीं दिखाया पर अमित शाह के संबोधन को लाइव दिखाया.

जैसा कि हम सभी जानते हैं, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 में कोलकाता में हुआ था. वह भारतीय जनसंघ (अब बीजेपी) के संस्थापक थे. इन्होंने साल 1929 में राजनीति की शुरूआत की थी. वह बंगाल विधान परिषद में चुने गए थे. श्यामा प्रसाद मुखर्जी साल 1947 में पंडित जवाहर लाल नेहरु की कैबिनेट में भी शामिल हुए थे. हालाकिं तीन साल बाद साल 1950 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने साल 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोलवलकर के कहने पर भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी. साल 1952 के चुनाव में जनसंघ के तीन सांसद चुने गए. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की अखंडता और कश्मीर का भारत में विलय के समर्थक थे. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर में धार 370 हटाने का विरोध करते रहे. हालाँकि अमित शाह ने अपने भाषण एक बार भी धारा ३७० का जिक्र नहीं किया.

उधर योगगुरु बाबा रामदेव उसी दिन हरिद्वार से सीधे लंदन पहुँच गए योग सिखाने और योग सिखाते सिखाते जो इंटरव्यू उन्होंने ABP न्यूज़ को दिया वह भी अपने आप में मायने रखता है. वहां बाबा ने अपने खास अंदाज में जहाँ महागठबंधन के सभी नेताओं, राहुल, अखिलेश, तेजस्वी, चन्द्रबाबू नायडू, ममता के साथ नीतीश की भी प्रशंसा कर डाली… वहीं पर उन्होंने मोदी जी को योग के साथ युद्ध(योगपूर्वक युद्ध) का भी मन्त्र दे दिया.

उनका कहना है कि कश्मीर में ठीक समय पर महबूबा के साथ सम्बन्ध विच्छेद हुआ है, अब मोदी जी को कुछ काम तेजी से करने होंगे. उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा – अब मोदी जी को कुछ काम बड़ी तेजी से करने होंगे.

एक तो आतंकवाद का का खात्माजिसके भी हाथ में पाकिस्तान या ISIS का झंडा दिखे, या जो कोई भी तिरंगा को जलाए, उसे सीधे गोली मार दो. दूसरा POK पर भारत का कब्ज़ा और तीसरा बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करा दें. अगर यह कम तेजी से होता है तो मोदी जी को २०१९ में कोई भी महागठबंधन हो या प्रलय ही क्यों न हो जाय; उन्हें २०१९ में पी एम बनाने से कोई भी नहीं रोक सकता. साथ ही उन्होंने कुछ योजनाओं पर तेजी से काम करने की चेतावानी भी दे डाली. गंगा सफाई से लेकर अन्य मुद्दों पर मोदी जी ने जो कहा है उसे जमीन पर होते दिखना चाहिए. यानी जो भी घोषणायें हैं, उनपर अमल भी उसी रफ़्तार से होनी चाहिए, जो कि अब तक नहीं हुआ है.

अब यह तो समय ही बताएगा कि अमित शाह और श्री नरेंद्र मोदी कौन सा चाल कब चलते हैं, ताकि वे २०१९ में पुन: सत्तारूढ़ हो सकें. महागठबंधन कबतक बनेगा और उसका नेता कौन होगा? सीट बंटवारा कैसे होगा? सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं. शरद पवार और केजरीवाल किस करवट बैठते हैं, उद्धव ठाकरे किस गठबंधन के सात अपना हाथ मिलाते हैं यह सब अभी भविष्य के गर्भ में छुपा पड़ा है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी पर जितना भी आरोप ये विपक्षी पार्टियाँ लगा ले, जबतक जनता को ये समझाने में कामयाब नहीं होंगे, कुछ फलाफल निकलनेवाला नहीं है.

चाहे जो भी हो राष्ट्र और राष्ट्र की जनता सर्वोपरि है. फैसला वही होना चाहिए जो राष्ट्र और जनता के हित में हो. नौजवानों को रोजगार मिले, किसान मजदूर को उनका हक़ मिले. गरीबों के साथ न्याय हो. महिला और दलितों पर जुल्म न हो. यही तो असली मुद्दा है, चाहे सरकारें जिसकी हो. जनता का भला होना चाहिए. सबका विकास होगा तभी तो सबका साथ होगा. क्या कहेंगे आपलोग?

जय हिन्द! जय भारत !

  • जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.