सुनहरा सपना

‘मैं एक सपना जी रही हूं’. ये शब्द हैं 18 वर्षीय हिमा दास के, जो फिनलैंड में आईएएएफ विश्व अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देशवासियों की आंख का तारा बन गईं. ऐथलेटिक्स में गोल्ड जीत पर हिमा का यह सुनहरा सपना पूरे होने के पीछे उसकी बहुत कठिन परिस्थितियों में बहुत कड़े परिश्रम का हाथ है.

असम के एक छोटे से गांव कांदुलिमारी के किसान परिवार में जन्मी 18 वर्षीय हिमा फुटबॉलर से शुरू होकर ऐथलेटिक्स में पहली भारतीय महिला विश्व चैंपियन बनने का उसका सफर उसकी अप्रतिम सफलता की कहानी है. वह महिला और पुरुष दोनों वर्गों में ट्रैक स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय भी हैं. उनके पिता रंजीत दास के पास दो बीघा जमीन है और उनकी मां जुनाली घरेलू महिला हैं. जमीन का यह छोटा सा टुकड़ा ही छह सदस्यों के परिवार की आजीविका का साधन है.

हिमा ने फिनलैंड के टेम्पेरे से कहा, ‘मैं अपने परिवार की स्थिति को जानती हूं और हम कैसे संघर्ष करते हैं, लेकिन ईश्वर के पास सभी के लिए कुछ होता है. मैं सकारात्मक सोच रखती हूं और मैं जिंदगी में आगे के बारे में सोचती हूं. मैं अपने माता-पिता और देश के लिए कुछ करना चाहती हूं.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन अब तक यह सपने की तरह रहा है. मैं अब विश्व जूनियर चैंपियन हूं.’

हिमा का विनम्र कथन है, ‘मैं पदक के बारे में सोचकर ट्रैक पर नहीं उतरी थी. मैं केवल तेज दौड़ने के बारे में सोच रही थी और मुझे लगता है कि इसी वजह से मैं पदक जीतने में सफल रही.’ उन्होंने कहा, ‘मैंने अभी कोई लक्ष्य तय नहीं किया है, जैसे कि एशियाई या ओलिंपिक खेलों में पदक जीतना. मैं अभी केवल इससे खुश हूं कि मैंने कुछ विशेष हासिल किया है और अपने देश का गौरव बढ़ाया है.’

रनर हिमा दास द्वारा वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद हर तरफ से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं. राजनेता, क्रिकेटर, ऐक्टर्स सब उनकी तारीफ कर रहे हैं. पीएम मोदी ने शुक्रवार को हिमा को बधाई देने के बाद शनिवार को उनकी रेस से जुड़ा विडियो भी शेयर किया. विडियो पोस्ट कर पीएम मोदी ने बताया कि ”हिमा जिस तरह से तिरगे को ढूंढ रही थीं, उसने उनके दिल को छू लिया”.

हिमा दास के इस सुनहरे सपने के साकार होने के लिए उसे सरकार ने सौगात दी है. अब तोक्यो ओलिंपिक तक मिलेगी आर्थिक सहायता.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।