हिंदी की मशाल

हिंदी दिवस 14 सितम्बर पर विशेष गीत 

 

(हिंदी की मशाल)2 लेके हमने अलख जगाया है (हिंदी की मशाल)
हिंदी की मशाल लेके हमने अलख जगाया है
जीवन को सजाया है-(हिंदी की मशाल)

 

 

1.चाहे हो परदेस, अब ये ही अपना देस, चमन ये प्यारा है
हिंदी का विकास, यहां अपना है प्रयास, अमन ये न्यारा है
(लेकर सबको साथ)2, डाले हाथों में अब हाथ
हमने आगे कदम बढ़ाया है, हिंदी की मशाल

 

 

2.लिखना सिखाते हैं, पढ़ना सिखाते हैं, सिखाते हिंदी बोलना
गाना सिखाते हैं, कविता सिखाते हैं, सिखाते नहीं डोलना
(लेकर सबको साथ)2, डाले हाथों में अब हाथ
हमने आगे कदम बढ़ाया है, हिंदी की मशाल

 

(तर्ज़- एक तेरा साथ, हमको दो जहां से प्यारा है———–)

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।