हास्य व्यंग्य

मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

यह तो आप भी जानते हैं, कि मुस्कुराने का कोई मोल नहीं लगता. हमारा भी कहना-मानना है-

मुस्कुराओ कि मुस्कुराने पर कोई मोल नहीं लगता,
गुनगुनाओ कि गुनगुनाने का कोई टोल नहीं लगता
हंसने-हंसाने को ही जीवन का लक्ष्य बनालो
सच्चे-मीठे बोलों जैसा प्यारा कोई बोल नहीं लगता.

 

बहुत समय पहले हमने आपके लिए एक ब्लॉग ”मोतियों की खेती” प्रस्तुत किया था, जिसमें हमारे नायक संजय को मोतियों की खेती करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, उसके बाद उनको मिलते हैं लाभ के रूप में ढेर सारे अनमोल मोती. मुस्कुराहट के मोती पाने के लिए कोई विशेष मेहनत नहीं करनी पड़ती है. बस सकारात्मक रहिए और मुस्कुराहट को अपना साथी बनाइए, मुस्कुराहट के अनमोल मोती आपके हो गए.

 

 

गिरते रुपये, बढ़ते चालू खाता घाटे पर काबू पाने की कवायद जारी है, इसके लिए भले ही चिंतित रहिए और सुधार के जो कुछ प्रयत्न कर सकते हों, करिए, पर बीच-बीच में मुस्कुराते भी रहिए. मुस्कुराहट रेकॉर्ड ऊंचाई पर आ जाए, इसके लिए चुटकुले पढ़िए. हमने आपके लिए एक चुटकुले को कविता में ढाला है, पढ़िए और मुस्कुराइए-

 

फिर साइकिल की साइकिल ही पल्ले पड़ी

पैदल चलकर पैर दुखे तो,
साइकिल लेकर खुशी मनाई.
साइकिल चलाकर पैर दुखे तो,
बाइक लेकर खुशी मनाई.
बाइक चलाकर पीठ दुखी तो,
कार लेकर खुशी मनाई.
कार चलाने से पेट निकला तो,
जिम जॉइन की और खुशी मनाई.
जिम गए तो फिर से वापस मिली साइकल,
फिर साइकिल की साइकिल ही पल्ले पड़ी तो,
आप ही बताएं, हमने खुशी मनाई!
कुछ और चुटकुले भी पढ़िए और हंसिए-

रोहन और मंत्री
रोहन मंत्री से मिलने गया 
मंत्री – अच्छा, तो क्या समस्या है तुम्हारी? 
रोहन – मेरे गांव में बारिश नहीं हो रही है.
मंत्री – तो इसमें हम क्या कर सकते हैं? 
रोहन – सुना है आजकल सारा काम कंप्यूटर से रहा है.
मंत्री – हां वो तो है? 
रोहन – तो थोड़ा पानी डाउनलोड करवा दीजिये ना.

स्‍कूल में छुट्टी

 

पप्‍पू: शायद कल हमारे स्‍कूल में छुट्टी रहेगी. 
राजू: क्‍यों, कल क्‍या है? 
पप्‍पू: असल में पत्नी कैसी होनी चाहिए, इस विषय पर हमारे हेडमास्टर ने दो घंटे का लेक्‍चर द‍िया था. मैंने उसकी र‍िकॉर्ड‍िंग उनकी पत्नी को भेज दी है.
मां और बेटा

मां: तुम ‘बच्चों का पालन-पोषण कैसे करें’ क‍िताब क्‍यों पढ़ रहे हो? 
बेटा: मैं देखना चाहता हूं कि मेरा पालन-पोषण ठीक से हो रहा है या नहीं.

 

लीजिए आपकी चिंता ऊपर तक पहुंच गई. अभी-अभी खबर आई है-

तेल की कीमतों और गिरते रुपये को संभालने के लिए जल्द समाधान तलाशेगी सरकार: अमित शाह

 

चलते-चलते
हिन्दी गहन व्यायवहारिक भाषा है … *अंग* की भंगिमा प्रयोगों में कितनी विशिष्ट है …

*हिन्दी नायाब है.*

अंग्रेजी में तो केवल एक ही शब्द है – *’LEG’*

*और हिंदी में -*

छू लो तो *चरण*, 
अड़ा दो तो *टाँग*, 
धँस जाए तो *पैर*,
आगे बढ़ाना हो तो *क़दम*, 
राह में चिह्न छोड़े तो *पद*, 
फूलने लगें तो हाथ – *पाँव*, 
गर्भधारणी हो तो भारी *पाँव*,
प्रभु के हों तो *पाद*, 
बाप की हो तो *लात*, 
गधे की पड़े तो *दुलत्ती*,
घुंघरू बाँध दो तो *पग*, 
खाने के लिए *टंगड़ी*,
खेलने के लिए *लंगड़ी* …

*इतनी उपयोगी भाषा आपने देखी दूसरी?*

 

कामेंट्स में आप भी ऐसे मजेदार चुटकुले भेज सकते हैं, जिनको पढ़कर चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाए.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

4 thoughts on “मुस्कुराने का कोई मोल नहीं

  1. वाह वाह , लीला बहन , हम मुस्करा दिए, मज़ा आ गिया पढ़ कर .

  2. आदरणीय बहन जी, अच्छा मनोरंजक ब्लॉग । बेझिझक मुस्कराएं जो भी गम हैं, ज़िन्दगी में टेंशन किसको कम है ? अच्छा या बुरा ये तो केवल भ्रम है, ज़िन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है । शादी क्या होती है जानने के लिए एक वैज्ञानिक ने शादी कर ली अब उसे समझ नहीं आ रहा विज्ञान क्या होता है ?

    1. प्रिय ब्लॉगर रविंदर भाई जी, आपकी शायरी और चुटकुले भी बहुत अच्छे और मनोरंजक लगे.
      मुस्कुराइए तो सही!

      चिंटू- मेरे पास वाट्सऐप है, फेसबुक है, तुम्हारे पास क्या है?
      मिंटू- मेरे पास कामकाज है.

      ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

  3. आज का चुटकुला-

    छुट्टियों का प्लान

    बंटी और रॉकी
    बंटी: इस साल छुट्टियों का क्या प्लान है?
    रॉकी: कुछ खास नहीं, पिछले साल यूरोप नहीं गए थे, इस साल अमेरिका नहीं जाएंगे।

    आज का सच-
    आज प्रधानमंत्री मोदी जी का जन्मदिन है. उन्हें की हार्दिक शुभकामनाएं.

    लीजिए आपकी चिंता ऊपर तक पहुंच गई. अभी-अभी खबर आई है-

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