ग़ज़ल

अभी किसी को’ भी’ नेता पे’ एतिकाद नहीं
प्रयास में असफल लोग नामुराद नहीं |
किये तमाम मनोहर करार, सब गए भूल
चुनाव बाद, वचन रहनुमा को’ याद नहीं |
गरीब सब हुए’ मुहताज़, रहनुमा लखपति
कहा जनाब ने’ सिद्धांत अर्थवाद नहीं |
जिहाद हो या’ को’ई और, कत्ल धर्म के’ नाम
मतान्ध लोग समझते हैं’, उग्रवाद नहीं |
कृषक सभी है’ दुखी दीन, गाँव में बसते
वो’ घोषणाएँ’ भलाई की’, ग्राम्यवाद नहीं |
हरेक धर्म में’ कुछ बात काबिले तारीफ़
को’ई भी’ धर्म कभी होता’ शुन्यवाद नहीं |
को’ई भी’ बात में’ विश्वास जो करे बिना’सोच
इसे कहे सभी’ धर्मान्ध, वुद्धिवाद नहीं |
करे यकीन सभी वाद में, सही हैं’ सभी
विवेक पर करे’ विश्वास, भूतवाद नहीं|
सभी चुनाव सभा में बवाल हो जाते
कि धर्म जलसा’ में’ कुछ फ़ित्ना’-ओ-फसाद नहीं |
शब्दार्थ अर्थवाद= पूंजीवाद
ग्राम्यवाद-गाँव/गाँववासी की बराबर उन्नति के कार्य
शुन्यवाद=जिसमे ज्ञान और सत्य का कोई मूल और
वास्तविक आधार न हो |
भूतवाद=भौतिकवाद

कालीपद ‘प्रसाद’

परिचय - कालीपद प्रसाद

जन्म ८ जुलाई १९४७ ,स्थान खुलना शिक्षा:– स्कूल :शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,धर्मजयगड ,जिला रायगढ़, (छ .गढ़) l कालेज :(स्नातक ) –क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान,भोपाल ,( म,प्र.) एम .एस .सी (गणित )– जबलपुर विश्वविद्यालय,( म,प्र.) एम ए (अर्थ शास्त्र ) – गडवाल विश्वविद्यालय .श्रीनगर (उ.खण्ड) कार्यक्षेत्र - राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कालेज ( आर .आई .एम ,सी ) देहरादून में अध्यापन | तत पश्चात केन्द्रीय विद्यालय संगठन में प्राचार्य के रूप में 18 वर्ष तक सेवारत रहा | प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त हुआ | रचनात्मक कार्य : शैक्षणिक लेख केंद्रीय विद्यालय संगठन के पत्रिका में प्रकाशित हुए | २. “ Value Based Education” नाम से पुस्तक २००० में प्रकाशित हुई | कविता संग्रह का प्रथम संस्करण “काव्य सौरभ“ दिसम्बर २०१४ में प्रकाशित हुआ l "अंधरे से उजाले की ओर" मुक्तक एवं काव्य संग्रह २०१५ में प्रकाषित | साझा गीतिका संग्रह "गीतिका है मनोरम सभी के लिए " २०१६ | उपन्यास "कल्याणी माँ " २०१६ में प्रकाशित |