खुशियों की बीन

आपने कभी खुशियों की बीन बजाई है? शायद आप में से अधिकतर लोग कहेंगे कि खुशियों की बीन तो क्या हमें तो बीन बजानी भी नहीं आती. चलिए पहले बीन की बात ही कर लेते हैं.

हमने अक्सर फिल्म या मेले-ठेले में सपेरों को बीन बजाकर सांप को नचाते हुए देखा है. हम सोचते हैं कि ”मन डोले, मेरा तन डोले, मेरे दिल का गया करार रे अब कौन बजाए बांसुरिया” गाने की मधुर धुन सुनकर सांप नाच रहा है, लेकिन सांप के तो कान ही नहीं होते, फिर वो सुनेगा कैसे? तो सपेरों ने इसका खूबसूरत मंत्र खोजा है. सपेरे बीन बजाते हुए गर्दन और बीन को झूमते हैं, बस सांप भी झूमने-नाचने लगता है. इसी तरह खुशियों के मंत्र हमें खुशियां प्रदान कर सकते हैं. आइए आज खुशियों के मंत्रों की बात ही कर लें.

हम सब सुखी रहना चाहते हैं, कोई दुःखी नहीं रहना चाहता. अगर प्रश्न पूछा जाए, कि ”दुनिया में ऐसा कौन है, जिसे खुशियों के मंत्र की आवश्यकता नहीं है?”, तो निश्चय ही उत्तर होगा ”कोई नहीं.” अब आप पूछेंगे, कि क्या ”खुशियों का भी कोई मंत्र होता है?” हमारा जवाब होगा, ”जी हां, खुशियों का भी मंत्र होता है, अवश्य होता है.” अब आप जानना चाहेंगे, ”खुशियों का मंत्र कहां है?” उत्तर होगा, ”हमारे अंदर ही है.” अब देखिए हम कहते हैं, नीचे लिखी पंक्ति को धीरे-धीरे पढ़िए-

GODISNOWHERE

कुछ लोग पढ़ेंगे-

GOD IS NO WHERE

कुछ लोग पढ़ेंगे-

GOD IS NOW HERE

अब देखा न! एक ही पंक्ति को पढ़ने के दो तरीके हुए. पहली तरह से पढ़ने के तरीके वाले लोग ”नकारात्मक” नज़रिए वाले होंगे और दूसरी तरह से पढ़ने के तरीके वाले लोग ”सकारात्मक” नज़रिए वाले होंगे, ठीक उसी तरह जैसे कि एक गिलास में थोड़े पानी को कुछ लोग आधा खाली (नकारात्मक) और कुछ आधा भरा (सकारात्मक) कहेंगे. अब हम आपको खुशियों के मंत्र के बारे में कुछ और बताते हैं.

 

 

अगर आप गूगल पर सर्च करेंगे कि दुनिया का सबसे खुश शख्स कौन है? तो आपके सामने नाम आएगा 69 साल के मैथ्यू रिकर्ड का. रिकर्ड तिब्बत में रहने वाले एक बौद्ध संत हैं, जो मूल रूप से फ्रांस के निवासी हैं. इस परिणाम के पीछे 12 साल की एक ब्रेन स्टडी है, जिसमें विस्कॉनसिन यूनिवर्सिटी के एक मनोवैज्ञानिक रिचर्ड डेविडसन ने रिकर्ड के दिमाग की 256 सेंसर्स की मदद से जांच की. हर बार उन्होंने पाया कि मेडिटेशन के दौरान रिकर्ड का दिमाग अस्वाभाविक रूप से उजला था.

 

 

इस संबंध में रिकर्ड का मानना है कि वह भी आम लोगों की तरह ही हैं, बस वह महसूस करते हैं कि वह दुनिया के सबसे खुश इंसान हैं. अगर आप दिनभर अपने बारे में सोचते रहेंगे, तो आप हमेशा उलझनों में फंसे रहेंगे. आप एक उदारवादी रवैया अपनाइए, इसकी मदद से दूसरों का व्यवहार भी आपके प्रति बेहतर हो जाएगा. इस सुझाव के साथ उन्होंने स्पष्टीकरण भी दिया, कि उनका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है, कि आप दूसरों को अपना फायदा उठाने दें. रिकर्ड के मुताबिक खुश रहना एक स्किल है, जिसे आप मेडिटेशन की ट्रेनिंग के जरिए हासिल कर सकते हैं.

 

 

रिकर्ड ने सुझाव दिया कि इस ट्रेनिंग की शुरुआत आप एक दिन में 10 से 15 मिनट अच्छे और खुशमिजाज विचारों के बारे में सोच कर करनी चाहिए. आपको अपने ज़ेहन को अच्छे विचारों के साथ बनाए रखने का अभ्यास करना चाहिए. इस अभ्यास के सकारात्मक परिणाम आप 2 हफ्तों में ही महसूस कर सकते हैं. अगर आप रिकर्ड की तरह निरंतर यह अभ्यास कर सकते हैं, तो आप भी खुशी का पर्याय बन सकते हैं. इस तथ्य का समर्थन मनोवैज्ञानिकों ने भी किया है. उनका भी मानना है कि रोजाना 20 मिनट खुश रहने के अभ्यास से आपको फायदा होगा.

 

 

एक रिटायर्ड सज्जन दिल के मरीज़ थे. डॉक्टर्स ने बाइ पास सर्जरी के अतिरिक्त कोई चारा न देखकर उनकी बाइ पास सर्जरी कर दी, जो वे सज्जन नहीं चाहते थे. यहां तक तो सही थी, अब डॉक्टर्स ने उनको सकारात्मक रवैया अपनाने को कहा, दुर्बलता की उस हालत में उनके लिए यह तनिक कठिन था. उनकी धर्मपत्नि को एक सरल-सा उपाय सूझा. एक दिन उनको YOUNG MAN कहकर संबोधित किया. सज्जन हंस पड़े और कहने लगे, काहे का YOUNG MAN, बाइ पास सर्जरी हो गई है. पत्नि ने उनको कहा- ”वाह, आप YOUNG MAN बनियान पहनते हैं, तो YOUNG MAN ही तो कहलाएंगे न! उसके बाद वह उनको उठते-बैठते YOUNG MAN कहकर संबोधित करतीं, YOUNG MAN भोजन का समय हो गया है, YOUNG MAN दवाई लीजिए, YOUNG MAN तनिक चहलकदमी कर लीजिए. देखते-ही-देखते वे सज्जन सकारात्मक YOUNG MAN हो गए और उनकी तबियत में डॉक्टर्स के हैल्थ चार्ट के मुताबिक सुधार होता गया. यह भी खुशी का एक मंत्र है.

 

 

कल हमने एक सेमीनार में एक प्रेज़ेनटेशन देखी थी. उसमें समझाया गया था, कि अगर हमारे विचार सकारात्मक होते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगें प्रवाहित होती हैं और नकारात्मक विचारों के साथ स्वभावतः इससे विपरीत होता है. इसके लिए कुछ उपाय भी बताए थे, जैसे आइने में देखकर खुद को ”I love you” कहना, यह भी रोजाना 20 मिनट कहना है. कामेंट्स में भी हम आपको खुशियों के कुछ मंत्रों के बारे में जानकारी देंगे, फिलहाल रिकर्ड को बधाइयां और शुभकामनाएं कहते हुए हम विराम लेते हैं.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।